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Fireballs Seen Across Continents: एक हफ्ते में चार महाद्वीपों पर ‘आग के गोले’! क्या सच में असामान्य है ये नज़ारा या सिर्फ गलतफहमी?

Fireballs Seen Across Continents: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन दिनों एक दावा तेजी से ट्रेंड कर रहा है—कि बीते एक हफ्ते में चार अलग-अलग महाद्वीपों में “कॉमेट” (धूमकेतु) देखे गए हैं। लोगों ने इसके वीडियो बनाकर शेयर किये हैं। इन घटनाओं को लेकर एक बेचैनी सी अनुभव की गई है। कई यूजर्स ने इसे असामान्य और रहस्यमयी घटना बताया है। कुछ इसे लेकर चिंतित हैं, लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इस पूरे मामले की पड़ताल की, तो तस्वीर कुछ और ही निकली। आप भी इसे जानकर चौंक जाएंगे।

क्या है पूरा मामला?

वायरल पोस्ट्स में दावा किया गया कि एक हफ्ते में 4 “कॉमेट” अलग-अलग देशों/महाद्वीपों में देखे गए। इसके बाद तो जैसे इस पर रिएक्शन की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों द्वारा इसे “नॉर्मल नहीं” बताया गया तो कुछ यूजर्स ने इसे किसी बड़ी खगोलीय या रहस्यमयी घटना से जोड़ दिया।

एक यूजर ने लिखा:

“इतने कम समय में चार कॉमेट? ये सामान्य नहीं है, कुछ तो गड़बड़ है।”

https://x.com/_TruthZone_/status/2034103343291707705?s=20

वहीं, दूसरे यूजर ने आशंका जताई:

“ऐसा पहले कभी याद नहीं आता कि एक हफ्ते में चार देशों में कॉमेट दिखे हों।”

https://x.com/Crypto_Angel_33/status/2034068948845478024?s=20

असलियत: कॉमेट नहीं, ‘फायरबॉल’ या उल्का पिंड

खगोल विज्ञान के जानकारों और कई फैक्ट-आधारित अकाउंट्स ने इन दावों को गलत बताया। उनके अनुसार ये घटनाएं कॉमेट (धूमकेतु) नहीं थीं, बल्कि ये फायरबॉल (आग के गोले) या मीटियोर (उल्का पिंड) थे। जब कोई छोटा अंतरिक्षीय पत्थर पृथ्वी के वायुमंडल में तेज गति से प्रवेश करता है, तो वह जलकर चमकदार रोशनी पैदा करता है—इसे ही फायरबॉल कहते हैं। यहां यह भी साफ करना आवश्यक है कि यह कोई असाधारण घटना नहीं है। 

https://x.com/BGatesIsaPyscho/status/2034004978315002285?s=20

कितनी आम हैं ऐसी घटनाएं?

सबसे अहम तथ्य यह है कि दुनिया भर में हर दिन 100 से ज्यादा फायरबॉल घटनाएं होती हैं। इनमें से ज्यादातर समुद्र या निर्जन इलाकों में गिरती हैं, इसलिए लोग नोटिस नहीं कर पाते हैं। आज के दौर में सोशल मीडिया और कैमरों की बढ़ती उपलब्धता के कारण अब ये घटनाएं ज्यादा रिकॉर्ड हो रही हैं

https://tesariaankh.com/current-affairs-indian-muslims-trending-on-x-social-media-debate/

NASA की ओर से कोई चेतावनी नहीं

सबसे खास बात यह है कि इस पूरे वायरल दावे में NASA की ओर से किसी भी नए या खतरनाक कॉमेट को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। यानी, संतोष की बात यह है कि किसी बड़े खगोलीय खतरे की बात फिलहाल निराधार है।

फिर क्यों हो रहा है कन्फ्यूजन?

अब एक सवाल उठता है कि जब कोई खगोलीय खतरा है ही नहीं तो इतनी हाय तौबा क्यों? इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं पहली बात कॉमेट या मीटियोर का भ्रम। आम लोग इन दोनों को एक जैसा समझ लेते हैं। दूसरी बात सोशल मीडिया का ओवर-हाइप देना। सोशल मीडिया पर अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर “असामान्य पैटर्न” बना दिया जाता है। तीसरी बात डर और साजिश की थ्योरी ये सबसे बड़ी है सस्ती लोकप्रियता या पोस्ट वायरल करने के लिए कुछ यूजर्स बिना वैज्ञानिक आधार के इसे रहस्यमयी या अपशकुन से जोड़ देते हैं।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

खगोल विज्ञान से जुड़े जानकारों के मुताबिक यह एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, पृथ्वी लगातार अंतरिक्षीय कणों से टकराती रहती है, इन घटनाओं का किसी बड़े खतरे से सीधा संबंध नहीं होता है। इस तरह सोशल मीडिया पर वायरल “चार कॉमेट” वाला दावा भ्रामक है। असल में ये अलग-अलग जगहों पर दिखे फायरबॉल/मीटियोर थे, जो एक सामान्य खगोलीय घटना है। इसलिए, हर चमकती रोशनी को “कॉमेट” समझना और उसे असामान्य बताना सही नहीं है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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