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छठ पूजा 2025: उषा अर्घ्य से समापन, समाज को दिया ये बड़ा संदेश

Chaath Puja: भारत में लोकआस्था और श्रद्धा का महापर्व छठ पूजा मंगलवार को ‘उषा अर्घ्य’ के साथ समापित हुआ। यह पर्व सूर्य देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। चार दिन तक चले इस पवित्र अनुष्ठान के अंतिम दिन, व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के प्रमुख नेताओं ने छठ पूजा की शुभकामनाएं दी।

प्रधानमंत्री मोदी का शुभकामना संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठ पूजा के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “भगवान सूर्यदेव को प्रात:कालीन अर्घ्य के साथ आज महापर्व छठ का शुभ समापन हुआ। चार दिवसीय इस अनुष्ठान के दौरान छठ पूजा की हमारी भव्य परंपरा के दिव्य दर्शन हुए। समस्त व्रतियों और श्रद्धालुओं सहित पावन पर्व का हिस्सा बने अपने सभी परिवारजनों का हृदय से अभिनंदन! छठी मईया की असीम कृपा से आप सभी का जीवन सदैव आलोकित रहे।”

दिल्ली सीएम का संदेश

दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा, “छठ पूजा का प्रातः अर्घ्य हमें यह याद दिलाता है कि हर नया दिन एक नई शुरुआत का अवसर लेकर आता है। सूर्यदेव को अर्पित यह अर्घ्य जीवन में ऊर्जा भरता है, विश्वास जगाता है और अनुशासन की प्रेरणा देता है। आज दिल्ली की यमुना भी इस दिव्य ऊर्जा से आलोकित हो रही है। आप सभी को आस्था के इस महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।”

असम सीएम का आशीर्वाद

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी इस पर्व को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “छठ महापर्व के अंतिम अनुष्ठान ‘उषा अर्घ्य’ के अवसर पर श्रद्धालुओं के साथ छठी मईया का आशीर्वाद प्राप्त करने का परम सौभाग्य मिला। जय सूर्य भगवान।”

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, “उषा अर्घ्य छठ पूजा का अंतिम दिन है, जो नई आशा, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। व्रती सूर्योदय से पहले घाट पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे और अपने व्रत का समापन करेंगे। सभी व्रतियों और उनके परिवारों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। सूर्य देव एवं छठी मईया आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।”

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री की शुभकामनाएं

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अपने आधिकारिक ‘एक्स’ पोस्ट के माध्यम से छठ पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “समस्त देशवासियों को आस्था, पवित्रता और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के चतुर्थ दिवस उषा अर्घ्य की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं! छठी मईया और भगवान सूर्यदेव की कृपा से सभी के जीवन में आरोग्य और सौभाग्य का संचार हो। जय छठी मईया!”

छठ पूजा का सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व

छठ पूजा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व भी है। यह पर्व सूर्य और प्रकृति के प्रति आस्था और श्रद्धा को व्यक्त करने का एक प्रमुख माध्यम है। इस पर्व के दौरान, लोग सूर्य देवता से अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

1. प्रकृति और ऊर्जा का सम्मान: छठ पूजा के माध्यम से सूर्य देवता की पूजा की जाती है, जो जीवन और ऊर्जा का स्रोत माने जाते हैं। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार और उसके संरक्षण का संदेश देता है।

2. सामाजिक समरसता: यह पर्व जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव से परे सभी को एक मंच पर लाकर सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है। हर वर्ग, समुदाय और पृष्ठभूमि के लोग इस अवसर पर एकजुट होते हैं और सूर्य देवता और छठी मईया की पूजा करते हैं।

3. परंपरा और स्वच्छता का प्रतीक: छठ पूजा भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जो स्वच्छता, अनुशासन और एकता का प्रतीक मानी जाती है। व्रती अपने घरों को स्वच्छ रखते हैं और पूरे त्यौहार के दौरान पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाने का प्रयास करते हैं।

4. राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रवाद: छठ पूजा न केवल व्यक्तिगत आस्था का पर्व है, बल्कि यह राष्ट्रवाद की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। पूरे देश में लोग इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं, और यह भारतीय संस्कृति की एकता और अखंडता को प्रदर्शित करता है।

सांस्कृतिक उत्थान और पर्यावरणीय जागरूकता

छठ पूजा में पर्यावरण की रक्षा के लिए कई कदम उठाए जाते हैं। इस दौरान, जल स्रोतों की सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह पर्व हमें न केवल आस्था और श्रद्धा के साथ प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को भी समझाता है।

छठ पूजा के मुख्य अनुष्ठान

छठ पूजा के दौरान कई प्रमुख अनुष्ठान होते हैं, जो चार दिन तक चलते हैं। पहले दिन ‘नहाय-खाय’ होता है, जिसमें व्रती शुद्धता के साथ स्नान करके विशेष व्रति भोजन करते हैं। दूसरे दिन ‘खरना’ होता है, जिसमें व्रती पूरे दिन उपवासी रहते हैं और सूर्य देवता को जल अर्पित करते हैं। तीसरे दिन ‘संध्या अर्घ्य’ अर्पित किया जाता है और चौथे दिन ‘उषा अर्घ्य’ के साथ पूजा का समापन होता है। इस दौरान, व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और व्रत समाप्त करते हैं।

छठ पूजा और समाज में एकता की भावना

इस पर्व का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक एकता और सामूहिकता को बढ़ावा देना है। छठ पूजा के दौरान, लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर सूर्य और छठी मईया की पूजा करते हैं, जिससे समाज में भाईचारे और एकता की भावना मजबूत होती है।

छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रकट करता है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार, पारंपरिक मूल्यों, और समाज में एकता की भावना को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेताओं द्वारा दी गई शुभकामनाओं ने इस पर्व की महिमा को और भी बढ़ा दिया है। इस प्रकार, छठ पूजा का महापर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का संदेश फैलाता है।

https://tesariaankh.com/chhath-puja-2025-starts-with-nahay-khay-ritual/

छठ पूजा के सामाजिक अनुष्ठान: समाज को जोड़ने वाला पर्व

छठ पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक पर्व भी है जो भारतीय समाज में गहरी जड़ें रखता है। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जाता है, और इसमें एक अद्भुत सामूहिकता, सामाजिक समरसता और एकता का अनुभव होता है।

छठ पूजा के अनुष्ठान इस बात को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं कि यह पर्व समाज के सभी वर्गों, जातियों, धर्मों और समुदायों को एक सूत्र में पिरोता है। आइए जानते हैं छठ पूजा के उन प्रमुख सामाजिक अनुष्ठानों के बारे में जो समाज को जोड़ने और जातिवाद, भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का काम करते हैं:

1. सामूहिक रूप से पूजा और अर्घ्य अर्पित करना

छठ पूजा का सबसे प्रमुख अनुष्ठान सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित करना है। इस प्रक्रिया में विशेष रूप से **संध्या अर्घ्य** और **उषा अर्घ्य** शामिल हैं, जहां लोग सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नदी या जल स्रोतों के किनारे एक साथ एकत्र होते हैं और सामूहिक रूप से सूर्य देवता की पूजा करते हैं।

इस दौरान, न केवल एक ही जाति या समुदाय के लोग इकट्ठा होते हैं, बल्कि लोग जाति, धर्म, और सामाजिक स्तर के भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ पूजा करते हैं। इस सांस्कृतिक मिलनसारिता से एकता और भाईचारे की भावना उत्पन्न होती है।

छठ घाटों पर सभी व्रति मिलकर सूर्य देवता की पूजा करते हैं, और इस दौरान किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं देखा जाता। एक ही घाट पर विभिन्न जातियों, वर्गों और धर्मों के लोग एक साथ बैठकर पूजा करते हैं, जो भारतीय समाज में समरसता और एकता की मिसाल पेश करता है।

2. सांस्कृतिक और धार्मिक सामूहिकता

छठ पूजा में पारंपरिक गीतों, भजनों और भक्तिमय चर्चाओं का विशेष महत्व है। लोग एक साथ मिलकर छठी मईया के गीत गाते हैं, जो समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं। इनमें “कांच ही बांस के बहंगिया” और “सूर्य देव की महिमा” जैसे गीत शामिल हैं जो पूजा की श्रद्धा और आस्था को प्रकट करते हैं। इन गीतों के माध्यम से ही लोग न केवल अपने व्यक्तिगत आस्था के अनुभव को साझा करते हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में सामूहिक सहभागिता को भी बढ़ावा देते हैं।

समाज में बुराईयों के खिलाफ जागरूकता का यह एक तरीका भी है। धार्मिक भावनाओं के साथ सामूहिकता में जो बल होता है, वह जातिवाद, भेदभाव और असमानता जैसी समस्याओं का सामना करने में मदद करता है।

3. व्रति और पारिवारिक एकता

छठ पूजा के दौरान व्रत रखने वाले लोग अपने परिवार के साथ यह पर्व मनाते हैं, जो पारिवारिक एकता को मजबूती प्रदान करता है।

सभी उम्र के लोग इस पूजा में शामिल होते हैं, चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग। हर उम्र का व्यक्ति मिलकर इस पर्व को एक साथ मनाता है, जो पारिवारिक संबंधों को और भी प्रगाढ़ बनाता है।

व्रति (जो लोग उपवास रखते हैं) अपने परिवार की मदद से पूजा के दौरान विभिन्न धार्मिक क्रियाओं को अंजाम देते हैं। यह सामूहिक भागीदारी परिवार में एकजुटता का प्रतीक बनती है।

व्रति के साथ परिवार का समर्थन न केवल एक आधिकारिक आस्था का मामला होता है, बल्कि यह समाज में सामाजिक सुरक्षा और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देता है। एक व्रति द्वारा किया गया कठोर उपवास और उसके लिए परिवार का सहयोग न केवल व्यक्तिगत समर्पण को दर्शाता है, बल्कि यह पूरे समुदाय में एकजुटता का संदेश भी देता है।

4. स्वच्छता और सामूहिक योगदान

छठ पूजा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है, और यह समाज को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का एक बड़ा अवसर बनता है। पूजा के दौरान घाटों और नदी किनारे स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य होता है।

समाज में स्वच्छता के प्रति चेतना का संचार करने के लिए लोग मिलकर घाटों की सफाई करते हैं, और यह एक सामूहिक प्रयास होता है। स्वच्छता के इस अभियान में सभी वर्गों के लोग भाग लेते हैं, जिससे भेदभाव समाप्त होता है और समाज में एकता की भावना बढ़ती है।

साथ ही, यह एक पर्यावरणीय संदेश भी है, क्योंकि लोग इस दौरान पर्यावरण की रक्षा के महत्व को समझते हुए प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में योगदान देते हैं।

5. व्रति और आयोजक के बीच सहयोग

छठ पूजा के आयोजन में सामाजिक सहयोग का अभूतपूर्व उदाहरण देखने को मिलता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सामूहिक योगदान का पर्व बन जाता है।

पूजा की सामग्री जुटाने से लेकर घाट की सफाई और अर्घ्य अर्पित करने तक, समाज के लोग एकजुट होकर काम करते हैं। कोई भी वर्ग या जाति एक दूसरे से दूर नहीं होता, बल्कि सभी मिलकर पूजा की व्यवस्थाएं करते हैं।

सामूहिक भोज और सहयोग से यह दिखता है कि समाज में वर्गभेद की कोई जगह नहीं है। यहां तक कि आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग भी समाज के अन्य वर्गों के साथ समान रूप से भाग लेता है।

6. जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव से परे एकता का प्रतीक

छठ पूजा विशेष रूप से यह संदेश देती है कि जब हम सूर्योदय और सूर्यास्त के समय एक साथ खड़े होते हैं, तो सभी समान होते हैं, और कोई भी भेदभाव नहीं होता।

* यह पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक है क्योंकि इसमें किसी भी जाति, धर्म या वर्ग के लोग भाग ले सकते हैं। चाहे कोई ब्राह्मण हो, यादव, मुस्लिम, या आदिवासी, छठ पूजा में सभी के लिए समान स्थान होता है।

https://x.com/PariatSukhi/status/1982852022828446218

छठ पूजा में एकता का संदेश समाज में एकजुटता, भाईचारे और समानता की भावना को फैलाता है। यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है, जो समाज में समरसता और सशक्तिकरण का कारण बनता है।

अंत में कह सकते हैं छठ पूजा एक ऐसा पर्व है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। इसके सामूहिक अनुष्ठान, जाति, धर्म और भेदभाव को नकारते हुए एकता और समानता का संदेश फैलाते हैं। इस पर्व के माध्यम से समाज में एकजुटता, पारिवारिक सहयोग और स्वच्छता की भावना को बढ़ावा मिलता है, जो भारतीय समाज की ताकत और विविधता को दर्शाता है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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