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Pramod Mahajan Birth Anniversary: क्या अमित शाह ने प्रमोद महाजन के स्थान की भरपाई की?

Pramod Mahajan Birth Anniversary: प्रमोद महाजन को भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) का चाणक्य माना जाता था, जिन्होंने पार्टी के अंदर और बाहर अपनी रणनीतिक सोच से अपने विरोधियों को मात दी। महाजन के निधन के बाद, यह सवाल उठा कि क्या भाजपा के अंदर उनका खाली हुआ स्थान भर पाया है? और क्या पार्टी अब भी उसी ताकत के साथ आगे बढ़ रही है, जैसा महाजन के नेतृत्व में था?

अटल बिहारी वाजपेयी युग में महाजन की राजनीतिक दूरदर्शिता, चतुर रणनीतियाँ और संगठनात्मक कौशल पार्टी की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। लेकिन, महाजन के निधन (2006) के बाद भाजपा के लिए अपनी राजनीतिक पहचान और नेतृत्व में रिक्तता उत्पन्न हुई थी। इस रिक्त स्थान को भरने के लिए अमित शाह जैसे कद्दावर नेता उभरे, जिन्होंने न केवल भाजपा की राजनीति को नए ढंग से पुनर्निर्मित किया, बल्कि उसे और भी ताकतवर बना दिया।

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प्रमोद महाजन: भाजपा के चाणक्य

प्रमोद महाजन का भाजपा में विशेष स्थान रहा कहने वाले आज भी कहते हैं कि यदि आज महाजन होते तो भाजपा को नई ऊंचाइयों पर ले जाते। वे न केवल एक सक्षम नेता थे, बल्कि उनकी राजनीतिक रणनीतियों ने पार्टी को कई महत्वपूर्ण मौकों पर सफलता दिलाई। महाजन के पास पार्टी को बढ़ावा देने, जनता को जोड़ने और विपक्षियों के खिलाफ चालाकी से वार करने की अद्भुत क्षमता थी। उन्होंने पार्टी को एक नया दिशा दिया और पार्टी के भीतर नेतृत्व के बदलावों का मार्ग प्रशस्त किया।

महाजन का योगदान:

महाजन ने पार्टी के संगठन को विभिन्न राज्यों में मजबूत किया, विशेष रूप से महाराष्ट्र में। महाजन की चाणक्य नीति ने पार्टी को चुनावी रणनीतियों में उस्ताद बना दिया। महाजन ने मीडिया के साथ अपने संबंध मजबूत किए, जिससे पार्टी को सकारात्मक प्रचार मिला। उनकी दूरदर्शिता और रणनीतिक क्षमताओं ने भाजपा को 1999 के लोकसभा चुनाव और 2004 के विधानसभा चुनाव में जीत दिलाई। लेकिन दो साल बाद ही एक दुखद हादसे में उनका अवसान हो गया।

अमित शाह का उभार:

प्रमोद महाजन के निधन के बाद भाजपा के भीतर और बाहर नेतृत्व में रिक्तता उत्पन्न हुई। लेकिन इस रिक्त स्थान को भरने में अमित शाह ने अपने राजनीतिक कौशल और नेतृत्व क्षमता से भाजपा को मजबूती दी।

शाह के नेतृत्व में भाजपा की ताकत:

शाह ने पार्टी के संगठन को लोकल स्तर तक विस्तारित किया। उन्होंने पार्टी के चुनावी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया और उनकी मनोरंजन क्षमता को महत्व दिया। अमित शाह ने 2014 और 2019 में भाजपा के लिए सफल चुनावी रणनीतियाँ बनाई, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, और पश्चिम बंगाल में पार्टी की उपस्थिति को मजबूत किया। महाजन की तरह, शाह ने भी विपक्षी नेताओं को चतुराई से मात दी। उन्होंने संघटनात्मक राजनीति में नई ऊँचाइयाँ हासिल की। शाह ने भाजपा के विकासात्मक एजेंडा को नए स्तर पर पहुँचाया और हिंदुत्व की विचारधारा को राजनीतिक मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित किया।

महाजन और शाह के बीच का अंतर:

महाजन जहां चाणक्य की तरह पार्टी की रणनीतिक राजनीति में माहिर थे, वहीं अमित शाह ने विधानसभा चुनावों में न केवल जीत सुनिश्चित की, बल्कि पार्टी के संगठन को जड़ से मजबूत किया। हालांकि शाह की कार्यशैली में महाजन की तरह के सिद्धांतवाद की कमी रही, लेकिन उन्होंने पार्टी की राजनीतिक लचीलापन और विपक्षियों से लड़ने की रणनीतियों को निखारा।

महाजन के रिक्त स्थान की भरपाई:

महाजन के निधन के बाद, भाजपा में नेतृत्व की जो रिक्तता उत्पन्न हुई थी, वह समय के साथ अमित शाह द्वारा भरी गई। अमित शाह ने महाजन की राजनीतिक दूरदर्शिता को आगे बढ़ाया, लेकिन उन्होंने एक नए तरह की संगठनात्मक राजनीति और चुनावी रणनीति अपनाई। महाजन का स्थान शाह ने चुनावी सफलता और विपक्षी नीतियों को विफल करने में भरा है। शाह ने महाजन की राजनीतिक दूरदर्शिता का अनुसरण करते हुए विरोधी दलों को सशक्त रूप से चुनौती दी। शाह ने पार्टी को देशभर में फैलाने का काम किया, और महाजन की तरह पार्टी को नई ऊँचाई पर पहुँचाया।

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प्रमोद महाजन की अनुपस्थिति के बावजूद, अमित शाह ने भाजपा को नई दिशा दी। शाह की कार्यशैली में महाजन की चाणक्य नीति की छाप साफ दिखती है, लेकिन उनका दृष्टिकोण और रणनीतिक कौशल भाजपा को एक नए दौर में ले आया है।

भाजपा ने महाजन के दौर से आगे बढ़कर अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी की स्थिरता और विस्तार सुनिश्चित किया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि महाजन की रिक्तता अब शाह के नेतृत्व में पूरी हो चुकी है और भाजपा फिर से एक शक्तिशाली राजनीतिक दल के रूप में उभरी है।

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Author: Tesari Aankh

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