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Air Pollution in India: खतरनाक! क्या सच में छोटी होती जा रहीं, लाखों करोड़ों जिंदगी

वायु प्रदूषण मानव जाति का “तुरंत खौफनाक अंत” नहीं करेगा, लेकिन अगर इसे अनदेखा किया गया तो यह मानव स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सभ्यताओं के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है। वैज्ञानिक दृष्टि से: वायु प्रदूषण किसी उल्कापिंड या परमाणु युद्ध की तरह एक झटके में मानव जाति को समाप्त नहीं करेगा। लेकिन यह एक “Slow Killer” है—धीमे ज़हर की तरह। नतीजतन समय से पहले मौतें बढ़ेंगी। WHO के अनुसार हर साल 70 लाख से अधिक मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी होती हैं।भारत में यह संख्या प्रदूषण के शिकार देशों में से सबसे अधिक है। इसका मतलब है मानव जाति तत्काल खत्म नहीं होगी, लेकिन लाखों-करोड़ों ज़िंदगियाँ छोटी होती जाएँगी। 

आने वाली पीढ़ियों पर असर

वायु प्रदूषण के चलते बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते, IQ और सीखने की क्षमता पर असर पड़ता है। गर्भ में पल रहे शिशुओं पर स्थायी प्रभाव आता है। यह जैविक और बौद्धिक क्षरण की ओर इशारा करता हैष कह सकते हैं कि वायु प्रदूषण सभ्यताओं का क्षय करेगा, न कि प्रजाति का अंत। इतिहास बताता है रोम, मेसोपोटामिया, हड़प्पा जैसी सभ्यताएँ, पर्यावरणीय असंतुलन से ढह गईं, लेकिन मानव जाति बची रही। वायु प्रदूषण भी वैसा ही खतरा है सभ्यताओं को कमजोर करने वाला

सबसे बड़ा डर: असमानता

जिस रफ्तार से हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है उससे सबसे बड़ा खतरा असमानता का पैदा हो रहा है। क्योंकि यह अमीरों को एयर प्यूरीफायर देता है, तो गरीबों को बीमारियाँ इससे समाज में असमानता, संघर्ष, स्वास्थ्य संकट, पलायन बढ़ सकता है

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वायु प्रदूषण पूरी तरह से मानव निर्मित समस्या है, इसलिए इसे कम किया जा सकता है, इसके लिए तकनीक मौजूद है, समाधान साबित हो चुके हैं और कई शहरों और देशों ने हवा सुधारी है, जैसे: लंदन (1950s के बाद), लॉस एंजेलिस, टोक्यो और भारत के कुछ छोटे शहरों में हवा का स्तर बेहतर है। असली सवाल यह नहीं है कि “क्या वायु प्रदूषण मानव जाति का अंत कर देगा?” बल्कि यह है कि क्या मानव जाति समय रहते समझदारी दिखाएगी?

इसलिए वायु प्रदूषण मानव जाति का अंत नहीं करेगा, लेकिन अगर हमने इसे नहीं रोका तो यह मानव जीवन की गुणवत्ता, अवधि और गरिमा को गंभीर रूप से नष्ट कर देगा।

भारत में वायु प्रदूषण: उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय चुनौती तक —

समस्याएँ, सकारात्मक पहल और समाधान

भारत में वायु प्रदूषण आज भी एक जटिल सार्वजनिक स्वास्थ्य व पर्यावरण समस्या बना हुआ है, खासकर उत्तर भारत के महानगरों और NCR क्षेत्र में सर्दियों के दौरान गंभीर स्तर पर पहुँचता है।

उत्तर प्रदेश और NCR की स्थिति

हाल के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता डेटा के अनुसार उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के क्षेत्रों में कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) *“खराब” से “गंभीर/सेवियर” श्रेणी तक दर्ज हुआ है, खासकर सर्दियों में। उदाहरण स्वरूप:

  • हापुड़, नोएडा, गाज़ियाबाद, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, मेरठ और बागपत जैसे शहरों में AQI बहुत खराब से गंभीर स्तर पर रहा, जिसमें PM2.5 कण प्रमुख प्रदूषक थे।

दिल्ली-NCR की तरह उत्तर प्रदेश के पर्यावरणीय परिदृश्य में भी वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियाँ, निर्माण धूल, और कृषि अवशेष जलाना जैसे कारण शामिल हैं।

https://x.com/Prash7nt/status/2001680143346241773?s=20

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: सबसे खराब और सबसे बेहतर शहर

भारत में वायु गुणवत्ता पर डेटा स्पष्ट रूप से विभाजित तस्वीर दिखाता है:

🔴 सबसे प्रदूषित शहर

2025 के CPCB डेटा के अनुसार अधिकतर उत्तरी/पूर्वी शहरों का AQI उच्च स्तर पर है। उदाहरण:

  • दिल्ली, घाज़ियाबाद, हापुड़, नोएडा (NCR/UP), के अलावा कई इंडस्ट्रियल व ट्रैफिक-ज्यादा वाले शहरों में AQI Very Poor/Severe श्रेणी।

🟢 सबसे स्वच्छ हवा वाले शहर

लेकिन भारत में कुछ अन्य क्षेत्रों में स्वच्छ हवा का सकारात्मक उदाहरण मिलता है जहाँ AQI Good श्रेणी में है:

  • तिरुनलवेली (तमिलनाडु)
  • नाहरलागुन (अरुणाचल प्रदेश)
  • मडिकेरी (कर्नाटक)
  • थंजावूर (तमिलनाडु)
  • कोप्पल (कर्नाटक)
  • शिलोंग (मेघालय)
  • नाशिक (महाराष्ट्र)
  • कन्नूर (केरल)
  • गदग (कर्नाटक) जैसे शहरों में स्थितियाँ अपेक्षाकृत बेहतर हैं।

ये शहर प्राकृतिक वायु परिसंचरण, कम औद्योगिक गतिविधि और बेहतर पर्यावरण प्रबंधन के कारण बेहतर श्रेणियों में दर्ज हैं।

वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर प्रभाव

वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गंभीर असर होता है और WHO समेत विभिन्न अध्ययन इसे प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम मानते हैं। प्रमुख प्रभावों में शामिल हैं:

  • श्वसन सम्बन्धी रोग जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस
  • फेफड़ों के कार्य में कमी
  • हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ना
  • क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD)
  • लंबे समय तक प्रदूषण संपर्क से फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ भी हो सकती हैं

विशेष रूप से PM2.5 (बहुत छोटे कण) रक्तप्रवाह में प्रवेश कर हृदय व फेफड़ों दोनों को प्रभावित कर सकता है, जो गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ाता है। (moef.gov.in)

सरकारी उपाय: नीतियाँ और कार्यक्रम

🔹 राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कदम

भारत सरकार व विभिन्न राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) ने वायु गुणवत्ता सुधार के लिए कई उपाय लागू किए हैं:

  • राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) और AQI निगरानी नेटवर्क का विस्तार
  • ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP), जो प्रदूषण स्तरों के अनुसार क्रमिक नियंत्रण उपाय लागू करता है जैसे निर्माण प्रतिबंध, वाहन नियंत्रण, आदि
  • वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत उत्सर्जन मानक लागू करना
  • राज्यस्तर पर स्वच्छ वायु कार्यक्रम, जैसे उत्तर प्रदेश में शहरों के लिए वायु गुणवत्ता नियंत्रण उपाय वायु shed हेतु योजनाएँ तैयार करना
  • रेलवे और समुदाय परिवहन में BS VI ईंधन मानक, इलेक्ट्रिक/सीएनजी वाहनों को बढ़ावा आदि

केंद्र और राज्य मिलकर प्रदूषण में कमी के लिये मॉनिटरिंग व नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कर रहे हैं।

गैर-सरकारी प्रयास और सामुदायिक पहल

सरकार के अलावा कई गैर-सरकारी संगठन (NGOs) व स्थानीय समुदाय भी सक्रिय हैं:

  • शिक्षा और जागरूकता अभियान
  • पेड़ लगाने और हरित क्षेत्र कार्यक्रम
  • स्वच्छ परिवहन倡ाएं
  • नागरिक विज्ञान परियोजनाएँ जो हवा की गुणवत्ता की निगरानी में समुदाय को शामिल करती हैं

इन पहलों से हवा की गुणवत्ता में स्थानीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।

समाधान: नागरिकों का योगदान

वायु प्रदूषण से निपटने के लिये हर नागरिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है:

कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग
ज्यादा से ज्यादा जंगल/पेड़ लगाना
खुले में कचरा जलाने से परहेज़
घर/कार में वायु शुद्धिकरण और संवेदनशील समूहों की सुरक्षा
शहरी नियोजन में हरित पट्टियाँ बढ़ाना

भारत के वायु प्रदूषण का परिदृश्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सकारात्मक बदलाव भी दिखाई दे रहे हैं: कुछ शहरों ने बेहतर AQI दर्ज करके यह संदेश दिया है कि समन्वित नीतियाँ, सामुदायिक सहभागिता और तकनीकी उपाय हवा को बेहतर बना सकते हैं।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्थायी और समग्र रणनीतियों के साथ, देश आज स्वच्छ हवा के लक्ष्य की दिशा में स्थिर कदम उठा रहा है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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