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AI Computing Capacity 2GB in 2026: AI कंप्यूटिंग क्षमता 2 GB: दुनिया में क्या बदलेगा?

AI Computing Capacity 2GB in 2026: दुनिया, निर्भरता, फायदे और चुनौतियाँ

नई दिल्ली।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वर्ष 2026 में एक नए चरण में प्रवेश करता दिख रहा है। AI मॉडल्स की कंप्यूटिंग क्षमता 2 गीगाबाइट स्तर तक पहुँचने का मतलब है कि अब अधिक शक्तिशाली AI सिस्टम सीधे मोबाइल, एज डिवाइस और रियल-टाइम प्लेटफॉर्म पर काम कर सकेंगे। यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी गहरा असर डालेगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 में AI पर दुनिया की निर्भरता पहले से कहीं अधिक बढ़ेगी, क्योंकि निर्णय-निर्माण, ऑटोमेशन और सेवाओं का बड़ा हिस्सा AI-आधारित हो जाएगा।

AI कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ने का क्या अर्थ है?

2 GB तक की AI कंप्यूटिंग क्षमता का सीधा मतलब है—

  • बड़े AI मॉडल्स को तेज़ और लोकल प्रोसेसिंग

  • क्लाउड पर निर्भरता में आंशिक कमी

  • मोबाइल, ड्रोन, मेडिकल डिवाइस और स्मार्ट मशीनों में ऑन-डिवाइस AI

इससे AI सिर्फ डेटा एनालिसिस टूल नहीं रहेगा, बल्कि स्वायत्त निर्णय लेने वाली तकनीक के रूप में उभरेगा।

https://x.com/teslaownersSV/status/2006404718315123190?s=20

2026 में AI पर निर्भरता क्यों बढ़ेगी?

  • हेल्थकेयर: AI आधारित डायग्नोसिस, रिपोर्ट एनालिसिस और सर्जरी असिस्टेंस

  • शिक्षा: पर्सनलाइज्ड AI ट्यूटर और स्किल-आधारित लर्निंग

  • इंडस्ट्री: स्मार्ट फैक्ट्रियाँ और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस

  • सरकार: नीति निर्माण, डेटा एनालिसिस और स्मार्ट गवर्नेंस

AI अब सहायक नहीं, बल्कि निर्णय का साझेदार बनता जा रहा है।

AI कंप्यूटिंग विस्तार के बड़े फायदे

1️⃣ उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि

AI से उत्पादन लागत घटेगी और काम की गति बढ़ेगी। इससे GDP ग्रोथ और इंडस्ट्रियल एफिशिएंसी में सुधार होगा।

2️⃣ स्वास्थ्य और शिक्षा में क्रांति

ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचेगी।

3️⃣ नए रोजगार और स्किल्स

AI इंजीनियरिंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और AI एथिक्स जैसे नए करियर विकल्प बढ़ेंगे।

AI के साथ आने वाली बड़ी चुनौतियाँ

⚠️ रोजगार पर असर

ऑटोमेशन से परंपरागत नौकरियों पर दबाव बढ़ेगा, जिससे री-स्किलिंग अनिवार्य हो जाएगी।

⚠️ डेटा सुरक्षा और निजता

AI जितना शक्तिशाली होगा, डेटा दुरुपयोग और निगरानी का खतरा उतना ही बढ़ेगा।

⚠️ डिजिटल डिवाइड

तकनीक-समृद्ध और तकनीक-वंचित समाज के बीच खाई गहरी हो सकती है।

⚠️ ऊर्जा और पर्यावरण

डेटा सेंटर्स की बढ़ती ऊर्जा मांग पर्यावरणीय दबाव बढ़ा सकती है।

भारत के लिए क्या मायने?

भारत के लिए 2026 का AI विस्तार—

  • डिजिटल इंडिया को नई गति

  • स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा

  • लेकिन साथ ही नीतिगत स्पष्टता, AI रेगुलेशन और स्किल मिशन की तत्काल जरूरत

2026 में AI कंप्यूटिंग क्षमता 2 GB तक पहुँचना तकनीकी मील का पत्थर है। इससे दुनिया अधिक स्मार्ट, तेज़ और कुशल बनेगी, लेकिन अगर नीति, नैतिकता और समावेशन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यही तकनीक नई असमानताओं को जन्म दे सकती है। AI का भविष्य शक्ति में नहीं, बल्कि उसके जिम्मेदार उपयोग में छिपा है।

भारत में AI का उपयोग: विकसित देशों की तुलना में कहाँ खड़ा है?

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपयोग और अपनाने की गति हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है। परंपरागत मानदंडों (जैसे AI readiness, infrastructure, शोध) में विकसित देशों के साथ भारत की स्थिति मिश्रित है—कुछ क्षेत्रों में भारत आगे है, कुछ में पीछे। नीचे इसका विस्तृत तुलनात्मक चित्र प्रस्तुत है:

1. AI उपयोग (Adoption) – आम जनता और व्यवसाय

उच्च AI उपयोग दर (Daily usage)

  • भारत में प्राथमिक सर्वेक्षणों के अनुसार लगभग 41% लोग रोज़ाना AI टूल्स का उपयोग करते हैं, जो अध्ययन में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से अधिक है। The Daily Guardian

  • Forrester रिपोर्ट के अनुसार भारत एशिया-पैसिफिक में अग्रणी है, जहां 56% शहरी उपयोगकर्ता जेनेरेटिव AI टूल्स का उपयोग करते हैं—जो ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर से आगे है। ETEnterpriseai.com

👉 इसका अर्थ यह है कि उपयोग की प्रचलन दर (penetration) विकसित देशों की तुलना में कम-से-कम मेट्रो और डिजिटल-सक्षम आबादी में बहुत तेजी से बढ़ रही है।

2. उद्योग और कंपनियों में AI अपनाने की गति

🔍 कंपनी-स्तर Adoption

  • BCG रिपोर्ट के अनुसार भारत में 30% कंपनियाँ AI का वायदे के अनुसार मूल्य उत्पन्न कर रही हैं, जो वैश्विक औसत 26% से ज़्यादा है। www.ndtv.com

  • हालांकि, केवल 4% कंपनियां अत्याधुनिक AI क्षमताओं तक पहुँच पा रही हैं, जो वैश्विक स्तर पर भी चुनौती है। www.ndtv.com

👉 यह संकेत देता है कि भारत में AI का औद्योगिक उपयोग बढ़ रहा है, परंतु गहराई में परिवर्तन (deep integration) की दिशा में अभी काफी काम बाकी है।

3. India vs Developed Nations (Readiness & Innovation)

यहाँ स्पष्ट विभाजन दिखाई देता है:

💡 जहाँ भारत आगे है:

  • उपयोग और AI-विश्वास:
    लगभग 76% भारतीय AI पर भरोसा रखते हैं, जबकि वैश्विक औसत लगभग 46% है। NDTV Profit Hindi

  • ChatGPT और Generative AI प्रयोग:
    भारत वैश्विक स्तर पर ChatGPT उपयोग में अमेरिका से आगे निकल चुका है। The Times of India

👉 इन आंकड़ों से पता चलता है कि विकसित देशों के समान AI उपयोग तेजी से जन-स्तर पर फैल रहा है।

जहाँ भारत पीछे है:

  • AI readiness index / infrastructure:
    IMF जैसे वैश्विक आँकड़ों के अनुसार विकसित देशों में — जैसे यूएस, यूरोप, सिंगापुर — AI के लिए मजबूत नीति, शोध, शिक्षा और क्लाउड/डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से उपलब्ध है; जबकि भारत में यह निर्माणाधीन है। The Indian Express

  • गहरी AI शोध और पेटेंट:
    भारत विकसित देशों की तुलना में AI शोध, पेटेंट आउटपुट और बुनियादी वैज्ञानिक-AI शोध उत्पादन में पीछे है (जैसे अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियाँ)। पेटेंट उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी काफी कम है। Reddit

👉 इसका मतलब है कि AI का बुनियादी वैज्ञानिक और नियामक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित देशों से अभी पीछे है।

 4. कुल मिलाकर तुलना

क्षेत्र भारत विकसित देश (USA/Europe/Singapore)
AI उपयोग दर (Daily use) है ↗ (उच्च वृद्धि; कई सर्वे में सामने) स्थिर/उच्च परंपरागत उपयोग
उद्योग में अपनाना बढ़ रहा ↗ (30% AI value creation) व्यापक पर गहरा समावेश
AI preparedness & infrastructure मध्य – विकसित हो रहा मजबूत एवं अग्रणी
AI में शोध और पेटेंट कम ज़्यादा
AI पर सार्वजनिक भरोसा बहुत उच्च (76%) मध्यम/उच्च

https://tesariaankh.com/new-year-resolutions-2026/

➡️ भारत में AI उपयोग की गति बहुत तेज़ी से बढ़ रही है, खासकर उपभोक्ता दर, जन-स्तर उपयोग, और कुछ उद्योग क्षेत्रों में—यह कुछ संकेतों में विकसित देशों से आगे भी निकल चुका है।

➡️ लेकिन AI के लिए मूलभूत शोध, पेटेंट, बुनियादी ढांचा और दीर्घकालिक नियामक/नीति समर्थन अभी विकसित देश स्तर तक नहीं पहुँचा है।

➡️ कुल मिलाकर भारत AI उपयोग में वैश्विक मानकों के करीब है, पर तकनीकी गहराई और बुनियादी क्षमता में अभी विकसित देशों से पीछे है

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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