Generative AI in Journalism: हैंड-कम्पोजिंग के दौर से लेकर ब्रोमाइट आउटपुट और फ्लॉपी डिस्क के सफर तक, पत्रकारिता ने तकनीक के कई रंग देखे हैं। आज हम जिस दौर में हैं, उसे ‘AI युग’ कहा जा रहा है। लेकिन एक मंझे हुए पत्रकार के लिए प्रश्न यह नहीं है कि AI खबर कैसे लिखेगा, बल्कि प्रश्न यह है कि AI का उपयोग अपनी ‘धार’ को और तेज करने के लिए कैसे किया जाए।
एआई (AI) लेखक नहीं, केवल एक ‘लाइब्रेरी’ है
गूगल आज उस कंटेंट को नकार रहा है जो पूरी तरह AI से लिखा गया है। कारण स्पष्ट है—AI नयापन (Originality) नहीं ला सकता। वह केवल उपलब्ध सूचनाओं को ‘री-राइट’ करता है। असली पत्रकारिता वह है जिसे हमने आंखों से देखा, कानों से सुना और महसूस किया।
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प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (Prompt Engineering) वह कला है जिससे आप इस विशाल डिजिटल लाइब्रेरी (AI) से अपनी जरूरत का सटीक संदर्भ (Reference) निकाल सकते हैं, ताकि आपका समय बचे और आप ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’ पर अधिक ध्यान दे सकें।
AI टूल्स का प्रभावी उपयोग: स्किल्स को ‘रिच’ करने के 3 मंत्र
1. रिसर्च और डेटा माइनिंग (Research, not Writing)
अगर आप किसी पुराने केस या ऐतिहासिक घटना पर लिख रहे हैं, तो AI से खबर न लिखवाएं। उसे एक ‘अर्काइव’ की तरह इस्तेमाल करें।
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प्रोफेशनल प्रॉम्प्ट: “1985 के दौर में प्रिंट मीडिया में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख तकनीकों और चुनौतियों की एक लिस्ट तैयार करें ताकि मैं अपने संस्मरण के साथ उनका मिलान कर सकूं।”
2. स्ट्रक्चर और फ्रेमवर्क (The Skeleton)
अक्सर बड़ी स्टोरी लिखते समय हम सूचनाओं के अंबार में खो जाते हैं। AI आपकी कहानी को एक ढांचा (Structure) दे सकता है।
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प्रोफेशनल प्रॉम्प्ट: “मैंने [विषय] पर एक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है। इसे एक इनवेस्टिगेटिव स्टोरी के रूप में पेश करने के लिए एक तार्किक आउटलाइन तैयार करें, जिसमें शुरुआत, मध्य और निष्कर्ष का सही प्रवाह हो।”
3. काउंटर-चेकिंग और एडिटिंग (The Second Eye)
अपनी लिखी हुई खबर को AI के सामने रखें और उससे पूछें कि इसमें क्या कमी है या कौन सा पक्ष छूट रहा है।
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प्रोफेशनल प्रॉम्प्ट: “इस लेख को एक अनुभवी संपादक की दृष्टि से पढ़ें और बताएं कि क्या इसमें किसी डेटा या तर्क की कमी है? ध्यान रहे, मुझे केवल सुझाव चाहिए, टेक्स्ट में बदलाव नहीं।”
‘लोकल पर फोकल’: एआई का काट (The Human Edge)
आज तमाम वेबसाइटें एआई की शिकार हो रही हैं क्योंकि वे ‘मेहनत’ का विकल्प खोज रही हैं। लेकिन एक पत्रकार के रूप में हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारा Style (शैली) और Observation (अवलोकन) है।
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AI यह बता सकता है कि बारिश हो रही है, लेकिन वह बारिश की मिट्टी वाली सोंधी महक का वर्णन नहीं कर सकता।
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यही वह ‘नयापन’ है जिसे गूगल ढूंढ रहा है।
https://tesariaankh.com/current-affairs-ai-agents-of-chaos-stanford-harvard-ai-manipulation-risk/
प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है; यह एक अनुभवी रिपोर्टर द्वारा अपने जूनियर को दिए गए ‘ब्रीफ’ की तरह है। जितना सटीक आपका ब्रीफ (प्रॉम्प्ट) होगा, उतना ही कीमती संदर्भ AI आपको देगा। हमें AI का उपयोग अपनी मेहनत कम करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी गुणवत्ता (Quality) बढ़ाने के लिए करना है।
Ramkrishna Vajpei -a senior journalist








