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AI human tool: एआई सुपर पावर नहीं, मानव का सहायक उपकरण

AI human tool: एआई को लेकर इस समय बहुत अधिक हल्ला है। देश से विदेश तक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो एआई के रूप में कोई सुपर पावर आ रही हो। एआई के इस्तेमाल को लेकर विभिन्न देशों की सरकारें अत्यधिक उत्साहित हैं। दिल्ली डिक्लेरेशन जैसी पहलें इसी उत्साह की अगली कड़ी हैं।

लेकिन इस पूरे उत्साह के बीच कई बुनियादी सवाल अनुत्तरित हैं। क्या सरकारें अपनी युवा शक्ति को एआई के सही और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए तैयार कर रही हैं? क्या वह ज्ञान-स्तर विकसित किया जा रहा है जो एआई को संचालित और नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है? या फिर एआई को इस तरह स्थापित किया जा रहा है कि वह धीरे-धीरे मानव श्रम और कौशल का स्थान ले ले?

यहीं सबसे बड़ा खतरा छिपा है। यदि एआई को मानव शक्ति का विकल्प बनाने का मनसूबा बनता है, तो यह आर्थिक संसाधनों और निर्णय-प्रक्रिया पर केंद्रीकृत नियंत्रण का माध्यम भी बन सकता है। जब समाज एआई पर निर्भर होकर भविष्य की राह तलाशने लगता है, तब वह अनजाने में अपने ही ज्ञान-आधार को कमजोर करने लगता है।

वास्तव में एआई कोई स्वायत्त बुद्धि नहीं है। वह एक टूल है—मानव द्वारा मानव के लिए बनाया गया टूल। उसकी नॉलेज उतनी ही है जितनी उसमें फीड की गई है। उसके आगे वह स्वयं कुछ नहीं जानता। इसलिए एआई-नियंत्रित दुनिया का सपना खतरनाक हो सकता है।

“एआई ज्ञान का स्रोत नहीं, मानव ज्ञान का विस्तार है; इसलिए नियंत्रण मशीन नहीं, मनुष्य के हाथ में रहना चाहिए।”

हर देश के लिए आवश्यक है कि वह अपने युवाओं को एआई के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करे—सिर्फ उपयोग के लिए नहीं, बल्कि उसकी सीमाओं को समझने के लिए भी। हमें एआई-नियंत्रित दुनिया नहीं चाहिए; हमें हर हाथ की पहुँच में एआई चाहिए।

यदि एआई को मानव शक्ति को रिप्लेस करने का माध्यम बना दिया गया, तो यह सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से गंभीर परिणाम ला सकता है। एआई हमारी भावनाओं के अनुरूप परिणाम दे सकता है, पर उसके लिए दिशा मनुष्य को ही तय करनी होती है। सही दिशा के बिना एआई भी भ्रमित परिणाम देगा।

“तकनीक तभी सुरक्षित है जब वह मानव क्षमता को बढ़ाए, उसे प्रतिस्थापित न करे।”

इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले अत्यंत सोच-समझकर कदम उठाना होगा, अन्यथा नतीजे भयावह हो सकते हैं। एआई एक वफादार मित्र हो सकता है, लेकिन उसका ज्ञान समग्र मानव जाति के ज्ञान का विकल्प नहीं बन सकता। वह वही निर्णय देगा जो उसमें डाले गए डेटा और मान्यताओं पर आधारित होगा।

https://x.com/wsjsbk33/status/2025426605276069998?s=20

आज एक गंभीर गलती यह हो रही है कि लोग एआई को किसी अंतिम प्राधिकारी या ‘गॉडफादर’ की तरह मानकर उसकी दी गई जानकारी पर आँख मूँदकर विश्वास करने लगे हैं। यह प्रवृत्ति खतरनाक है। ज्ञान को सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता; वह एक अंतहीन बहती धारा है। जहाँ हम पहुँचते हैं, वहीं से आगे वह उतनी ही विस्तृत दिखाई देती है।

“एआई नदी से जल ले सकता है, पर स्वयं ज्ञान की नदी नहीं बन सकता।”

https://tesariaankh.com/politics-ai-summit-youth-protest-foreign-media-analysis/

अतः आवश्यक है कि हम एआई को शक्ति नहीं, साधन मानें; निर्णय नहीं, सहयोग समझें। भविष्य एआई का नहीं, एआई-सक्षम मानव का होना चाहिए।

“जहाँ एआई निर्णय लेने लगे और मनुष्य केवल पालन करे, वहीं से सभ्यता का जोखिम शुरू होता है।”

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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