पंजाब की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल पदों से नहीं, बल्कि निरंतर सार्वजनिक उपस्थिति, सामाजिक सरोकार और राजनीतिक स्थायित्व से पहचाने जाते हैं। शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल इन्हीं नामों में शामिल हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में महिला प्रतिनिधित्व की एक मजबूत प्रतीक भी हैं।
MP Harsimrat Kaur Badal Political Profile: राजनीतिक विरासत से सार्वजनिक जीवन तक
25 जुलाई 1966 को नई दिल्ली में जन्मीं हरसिमरत कौर का संबंध एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से रहा है। पिता सत्यजीत सिंह मजीठिया और बाद में विवाह के बाद बादल परिवार—इन दोनों विरासतों ने उन्हें राजनीति के बेहद करीब ला दिया। लेकिन विरासत के बावजूद, उन्होंने अपनी पहचान संसद, मंत्रालय और जमीनी राजनीति में लगातार सक्रिय रहकर बनाई। उनका विवाह 1991 में सुखबीर सिंह बादल से हुआ, जो शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे हैं। तीन बच्चों की मां होने के बावजूद, हरसिमरत कौर ने सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रियता बनाए रखी—जो भारतीय राजनीति में आसान नहीं माना जाता।
संसद में लंबी और स्थिर मौजूदगी
हरसिमरत कौर बादल 2009 में पहली बार लोकसभा पहुंचीं और तब से लगातार बठिंडा का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वे 15वीं, 16वीं, 17वीं और अब 18वीं लोकसभा की सदस्य हैं। यह निरंतरता उन्हें पंजाब के सबसे अनुभवी महिला सांसदों में शामिल करती है। संसद में उनकी भूमिका केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं रही। वे कृषि, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और खाद्य प्रसंस्करण जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ी समितियों का हिस्सा रही हैं।
केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका
2014 से 2020 तक हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने किसान-उत्पाद आधारित उद्योगों, फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर और ग्रामीण रोजगार को लेकर कई योजनाओं को आगे बढ़ाया। हालांकि 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी दिया—कि पार्टी और पंजाब के हित उनके लिए सत्ता से ऊपर हैं। यह फैसला उन्हें राजनीतिक रूप से अलग पहचान देता है।
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महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकार
2025 में उन्हें महिला सशक्तिकरण समिति का सदस्य बनाया गया। राजनीति के अलावा वे सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी रही हैं—खासतौर पर महिलाओं और ग्रामीण समाज से जुड़े मुद्दों पर। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि (टेक्सटाइल डिजाइनिंग में स्नातक) और सामाजिक कार्यकर्ता की पहचान ने उन्हें केवल “राजनीतिक परिवार की बहू” से आगे एक स्वतंत्र सार्वजनिक चेहरा बनाया।
आलोचना और राजनीतिक चुनौतियाँ
बादल परिवार की राजनीति अक्सर आलोचनाओं के केंद्र में रही है और हरसिमरत कौर भी इससे अछूती नहीं रहीं। सत्ता में रहते हुए विपक्ष ने उन पर वंशवादी राजनीति के आरोप लगाए, वहीं समर्थकों का कहना रहा कि उन्होंने हर जिम्मेदारी को सक्रियता से निभाया।
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वर्तमान भूमिका और भविष्य
18वीं लोकसभा में वे कई अहम संयुक्त समितियों का हिस्सा हैं, जिनमें संविधान संशोधन और जम्मू-कश्मीर से जुड़े विधेयक शामिल हैं। यह संकेत देता है कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका अभी समाप्त नहीं हुई है। हरसिमरत कौर बादल आज पंजाब की उन महिला नेताओं में हैं, जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता नहीं, बल्कि निरंतर सार्वजनिक उत्तरदायित्व के रूप में जिया है।








