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Ganga Expressway UP: गंगा एक्सप्रेसवे से जेवर एयरपोर्ट तक: यूपी के विकास मॉडल का विश्लेषण

Ganga Expressway UP: लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक केवल परियोजनाओं की प्रगति का औपचारिक आकलन नहीं थी, बल्कि यह उत्तर प्रदेश को इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास मॉडल पर आगे ले जाने की सरकार की स्पष्ट रणनीति को भी दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेसवे से लेकर जेवर एयरपोर्ट, सिंचाई, ऊर्जा, शिक्षा और रेल कनेक्टिविटी तक जिन योजनाओं पर एक साथ फोकस किया, वह बताता है कि सरकार अब “अलग–अलग परियोजनाओं” के बजाय इंटीग्रेटेड ग्रोथ अप्रोच पर काम कर रही है।

गंगा एक्सप्रेसवे: कनेक्टिविटी नहीं, आर्थिक कॉरिडोर

594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि इसे औद्योगिक, कृषि और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। 12 जिलों और 500 से अधिक गांवों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक दूरी को कम करेगा। रफनेस इंडेक्स और राइडिंग कम्फर्ट जैसे तकनीकी मानकों पर गुणवत्ता परीक्षण यह संकेत देता है कि सरकार अब केवल समय पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की सड़कों पर जोर दे रही है।

जेवर एयरपोर्ट: यूपी को एयर कार्गो हब बनाने की तैयारी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-3 के लिए भूमि अधिग्रहण तेज करने के निर्देश यह दिखाते हैं कि सरकार इस परियोजना को केवल यात्री सुविधा तक सीमित नहीं रखना चाहती। मुख्यमंत्री का यह कहना कि एयरपोर्ट के शुभारंभ से उत्तर प्रदेश एयर कार्गो हब बनेगा, संकेत देता है कि कृषि उत्पाद, एमएसएमई और निर्यात आधारित उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की ठोस योजना है।

सिंचाई और ऊर्जा: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़

मध्य गंगा नहर, एरच परियोजना और रिहंद–ओबरा पंप स्टोरेज योजनाओं की समीक्षा यह दर्शाती है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं रख रही। सिंचाई परियोजनाओं से कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ेगी, जबकि ऊर्जा परियोजनाएं औद्योगिक निवेश के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

लॉजिस्टिक्स और रेल कनेक्टिविटी: निवेश आकर्षण की बुनियाद

ग्रेटर नोएडा के मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट हब को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना उत्तर प्रदेश को सप्लाई-चेन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं बहराइच–श्रावस्ती–बलरामपुर–सिद्धार्थनगर–संतकबीरनगर नई रेल लाइन सीमावर्ती और आकांक्षात्मक जिलों को मुख्यधारा से जोड़कर क्षेत्रीय असंतुलन कम करेगी।

https://x.com/krupesh89371/status/2015716518684996091?s=20

शिक्षा और विकास का सामाजिक पक्ष

150 मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों पर जोर यह स्पष्ट करता है कि सरकार भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ मानव संसाधन विकास को भी समान रूप से महत्वपूर्ण मान रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विकास की दीर्घकालिक पूंजी के रूप में देखा जा रहा है।

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यह बैठक इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक परिवर्तन के साधन के रूप में देख रही है। यदि तय समयसीमा और गुणवत्ता दोनों पर यह योजनाएं पूरी होती हैं, तो उत्तर प्रदेश का स्वरूप अगले दशक में एक मजबूत निवेश और उत्पादन केंद्र के रूप में उभर सकता है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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