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Winning without war UPSC: युद्ध की सर्वोच्च कला: शत्रु को बिना युद्ध किए पराजित करना

Winning without war UPSC: “युद्ध की सर्वोच्च कला शत्रु को बिना युद्ध किए पराजित करना है”—यह उक्ति प्राचीन चीनी सैन्य दार्शनिक सन त्ज़ु (Sun Tzu) के ग्रंथ आर्ट ऑफ वॉर से ली गई है। यह कथन केवल युद्धनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीति, कूटनीति, अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आंतरिक शासन तक गहराई से लागू होता है। आधुनिक विश्व में जहाँ युद्ध विनाश, मानवीय संकट और आर्थिक तबाही का पर्याय बन चुका है, वहाँ यह विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

यह उक्ति हमें यह सिखाती है कि वास्तविक विजय वह नहीं होती जो रणभूमि में रक्तपात के बाद मिले, बल्कि वह होती है जो बुद्धि, रणनीति, नैतिक दबाव और विवेकपूर्ण निर्णयों के माध्यम से हासिल की जाए।

युद्ध और विजय की पारंपरिक अवधारणा

इतिहास में युद्ध को शक्ति प्रदर्शन और प्रभुत्व स्थापित करने का साधन माना गया है। सिकंदर, चंगेज़ ख़ान, नेपोलियन या द्वितीय विश्व युद्ध—हर जगह निर्णायक युद्धों ने इतिहास की दिशा बदली। किंतु इन युद्धों की कीमत असंख्य जानें, नष्ट सभ्यताएँ और पीढ़ियों तक चलने वाले घाव रहे।

सन त्ज़ु की दृष्टि इससे भिन्न थी। वे मानते थे कि युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए। यदि शत्रु की रणनीति विफल कर दी जाए, उसके संसाधन, मनोबल और समर्थन को कमजोर कर दिया जाए, तो बिना तलवार उठाए ही विजय संभव है।

बिना युद्ध विजय के साधन

1. कूटनीति और संवाद

कूटनीति शांति का सबसे प्रभावी हथियार है। समझौते, संधियाँ, मध्यस्थता और बहुपक्षीय मंच युद्ध की संभावना को कम करते हैं।
भारत की “गुटनिरपेक्ष नीति” और आज की “रणनीतिक स्वायत्तता” इसका उदाहरण हैं, जहाँ देश ने सैन्य संघर्ष से बचते हुए अपने हित सुरक्षित रखे।

2. आर्थिक शक्ति और प्रतिबंध

आधुनिक युग में आर्थिक दबाव युद्ध से अधिक प्रभावी सिद्ध हो रहा है। आर्थिक प्रतिबंध, व्यापारिक निर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला नियंत्रण किसी देश को बिना गोली चलाए झुकने पर मजबूर कर सकते हैं।
ईरान, रूस और उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंध इसका उदाहरण हैं।

3. सूचना और साइबर युद्ध

आज की लड़ाई सूचना की है। प्रचार, दुष्प्रचार, साइबर हमले और डिजिटल नैरेटिव किसी देश की आंतरिक स्थिरता को कमजोर कर सकते हैं। यह युद्ध दिखता नहीं, पर प्रभाव गहरा होता है।

4. सॉफ्ट पावर

संस्कृति, शिक्षा, योग, लोकतांत्रिक मूल्य और नैतिक नेतृत्व—ये सभी सॉफ्ट पावर के तत्व हैं।
भारत की योग कूटनीति, बौद्ध विरासत और वैश्विक नेतृत्व छवि ने उसे बिना सैन्य टकराव के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव दिलाया है।

भारतीय परंपरा में इस विचार की झलक

भारतीय दर्शन और राजनीति में भी यह अवधारणा गहराई से विद्यमान है।

  • महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी—बिना सशस्त्र युद्ध के।
  • चाणक्य ने साम, दाम, दंड, भेद की नीति बताई, जिसमें युद्ध (दंड) अंतिम उपाय है।
  • भगवद्गीता में भी युद्ध को धर्म और विवेक से जोड़ा गया है, न कि अंधे हिंसा से।

समकालीन अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

आज का विश्व परमाणु हथियारों से लैस है। प्रत्यक्ष युद्ध का अर्थ वैश्विक विनाश हो सकता है। इसलिए—

  • शीत युद्ध में अमेरिका और सोवियत संघ सीधे नहीं लड़े, बल्कि रणनीति, गठबंधन और प्रभाव क्षेत्रों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा की।
  • चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव सैन्य विस्तार से अधिक आर्थिक और कूटनीतिक विस्तार का उदाहरण है।
  • भारत-चीन संबंधों में भी सीमा तनाव के बावजूद पूर्ण युद्ध से बचना इसी सोच का परिणाम है।

क्या बिना युद्ध विजय हमेशा संभव है?

यह विचार आदर्शवादी प्रतीत हो सकता है, पर व्यवहार में हर स्थिति में लागू नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में—

  • आत्मरक्षा
  • संप्रभुता की रक्षा
  • मानवाधिकारों की रक्षा

के लिए युद्ध अपरिहार्य हो सकता है। 1962, 1971 या कारगिल युद्ध में भारत का रुख इसका उदाहरण है।
अतः यह उक्ति युद्ध के पूर्ण निषेध की नहीं, बल्कि युद्ध को अंतिम विकल्प मानने की सीख देती है।

यूपीएससी दृष्टि से महत्त्व

यह विषय—

  • नैतिकता (GS Paper IV)
  • अंतरराष्ट्रीय संबंध (GS Paper II)
  • निबंध पत्र

तीनों के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह अभ्यर्थी की रणनीतिक सोच, संतुलित दृष्टिकोण और दार्शनिक समझ को दर्शाता है।

https://x.com/krishna_tupe/status/2004537075430015278?s=20

“युद्ध की सर्वोच्च कला शत्रु को बिना युद्ध किए पराजित करना है” केवल एक सैन्य सिद्धांत नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के परिपक्व होने का संकेत है। यह हमें सिखाता है कि वास्तविक शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि विवेक, संवाद, दूरदृष्टि और नैतिक साहस में निहित है।

https://tesariaankh.com/job-education-furteela-kintu-santulit-vyakti-upsc-nibandh/

आज के जटिल और परस्पर निर्भर विश्व में, यही सोच राष्ट्रों को स्थायी शांति, विकास और सम्मान की ओर ले जा सकती है। युद्ध जीत सकता है, लेकिन बिना युद्ध की विजय ही सच्ची और स्थायी होती है

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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