Homi Bhabha legacy: भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक और आधुनिक वैज्ञानिक संस्थानों के वास्तुकार डॉ. होमी जहांगीर भाभा अपनी 60वीं पुण्यतिथि पर एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। विज्ञान, ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की बहस के बीच उनका नाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर ट्रेंड कर रहा है।
मुंबई में 1909 में जन्मे होमी भाभा ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और स्वतंत्र भारत को विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा। इसी सोच का परिणाम था 1945 में टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और आज़ादी के तुरंत बाद परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना। बाद में भाभा के नेतृत्व में विकसित संस्थान आज BARC जैसे विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्रों के रूप में जाने जाते हैं।
आज क्यों ज़रूरी हैं भाभा?
जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की बात कर रही है, तब भाभा की दूरदृष्टि और भी प्रासंगिक हो जाती है।
1950 के दशक में उन्होंने भारत के लिए तीन-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी—जिसका उद्देश्य सीमित यूरेनियम संसाधनों के बावजूद देश के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करना था।
आज भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता का एक बड़ा हिस्सा उसी रणनीतिक सोच पर आधारित है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में थोरियम-आधारित रिएक्टर भारत को ऊर्जा क्षेत्र में निर्णायक बढ़त दिला सकते हैं।
एक्स पर क्या कह रहे हैं लोग?
होमी भाभा को याद करते हुए एक्स पर हजारों पोस्ट सामने आए—
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एक यूज़र ने लिखा,
“He was not just a scientist, he was a nation-builder. India’s energy future still follows his roadmap.” -
एक अन्य पोस्ट में कहा गया,
“Homi Bhabha deserves to be taught more deeply in schools. His vision was decades ahead of his time.” -
कई यूज़र्स ने भाभा की आइंस्टीन के साथ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि यह भारत के उस दौर की पहचान है, जब देश वैज्ञानिक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा था।
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कुछ लोगों ने लोकप्रिय वेब सीरीज़ Rocket Boys का ज़िक्र करते हुए कहा कि इससे युवा पीढ़ी को भाभा और भारतीय विज्ञान के इतिहास को समझने में मदद मिली।
रहस्य से जुड़ी चर्चाएँ भी, लेकिन विरासत अडिग
भाभा की 1966 में हुई विमान दुर्घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ अटकलें भी सामने आती रहती हैं, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय इस बात पर एकमत है कि उनकी असली पहचान उनके विचार, संस्थान और दीर्घकालिक दृष्टि है, न कि विवाद।
https://tesariaankh.com/politics-tr-baalu-dmk-mp-profile/
विज्ञान से राष्ट्र निर्माण तक
भाभा सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित वैज्ञानिक नहीं थे। उन्होंने यह सिद्ध किया कि
विज्ञान + नीति + संस्थान = राष्ट्र निर्माण।
पर्यावरण, परमाणु ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका को आकार देने में उनकी सोच निर्णायक रही।
https://x.com/ParveenKaswan/status/2014881445198938322?s=20
60 साल बाद भी होमी जहांगीर भाभा इसलिए याद किए जा रहे हैं क्योंकि
उनका सपना अधूरा नहीं था—वह आज भी भारत के रिएक्टरों, प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिकों और ऊर्जा नीतियों में जीवित है।
यही कारण है कि वे इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि आज के भारत की वैज्ञानिक बहस के केंद्र में हैं।








