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Shaksgam Valley dispute: शाक्सगम घाटी पर भारत-चीन आमने-सामने, सीमा तनाव तेज

Shaksgam Valley dispute: शाक्सगम घाटी पर फिर आमने-सामने भारत और चीन, सामरिक महत्व से लेकर सोशल मीडिया तक उबाल

नई दिल्ली।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद का केंद्र है शाक्सगम घाटी (Shaksgam Valley)—लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाली वह रणनीतिक घाटी, जिस पर भारत लंबे समय से अपना दावा करता रहा है। हालिया घटनाक्रम ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने तीखा उबाल ला दिया है।

भारत का स्पष्ट रुख

9 जनवरी को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि शाक्सगम घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने 1963 के चीन-पाकिस्तान समझौते को अवैध करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान को इस क्षेत्र को चीन को सौंपने का कोई अधिकार नहीं था।
भारत ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के मार्ग का भी कड़ा विरोध किया है और इसे भारतीय संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

चीन की प्रतिक्रिया

इसके जवाब में 12 जनवरी को चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बयान जारी कर शाक्सगम घाटी को “चीनी क्षेत्र” बताया। चीन ने कहा कि वहां किया जा रहा बुनियादी ढांचा विकास पूरी तरह “कानूनी और जायज़” है और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है।

शाक्सगम घाटी का सामरिक महत्व

शाक्सगम घाटी का विवाद केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहराई से सामरिक और सैन्य महत्व से जुड़ा है।

  • यह क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है

  • भारत 1984 से सियाचिन पर नियंत्रण बनाए हुए है

  • शाक्सगम घाटी, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और शिनजियांग को जोड़ने वाले संवेदनशील भूभाग में आती है

  • यहां बनने वाली सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की दृष्टि में रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं

https://x.com/UPSCprepIAS/status/2010310367529054584?s=20

भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में चीन की सड़क और सैन्य गतिविधियां दो-फ्रंट चुनौती (चीन-पाकिस्तान गठजोड़) को और मजबूत कर सकती हैं।

CPEC और भारत की चिंता

CPEC परियोजना का यह हिस्सा भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और विवादित क्षेत्रों से होकर गुजरता है। भारत का तर्क है कि इस तरह की परियोजनाएं न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी खतरा पैदा करती हैं।

सोशल मीडिया पर उबाल

शाक्सगम घाटी विवाद को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

  • #ShaksgamValley

  • #IndiaChinaBorder

  • #CPEC

  • #Sovereignty

जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।
एक वर्ग चीन की आक्रामक रणनीति पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरा वर्ग सरकार से कड़े कूटनीतिक और सैन्य कदम उठाने की मांग कर रहा है। कई रक्षा विश्लेषकों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर खुलकर राय रखी है।

सीमा तनाव की पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन विश्वास बहाली की प्रक्रिया अभी अधूरी मानी जा रही है।

https://tesariaankh.com/lohri-indian-culture-hindutva/

शाक्सगम घाटी का मुद्दा एक बार फिर यह स्पष्ट करता है कि भारत-चीन सीमा विवाद केवल नक्शों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीति, संप्रभुता और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस विवाद को कूटनीतिक स्तर पर कैसे संभालते हैं, या यह तनाव एक नई चुनौती का रूप लेता है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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