Dragon: भय, शक्ति और दिव्यता की मिथकीय कहानी
कल्पना कीजिए—आग उगलता एक विशाल जीव, पंख फैलाए आकाश में मंडराता हुआ, जिसकी आँखों में रहस्य और शक्ति दोनों बसते हों। दुनिया की लगभग हर सभ्यता ने किसी न किसी रूप में इस जीव को जाना है। यही है ड्रैगन—एक ऐसा मिथकीय प्राणी, जो कहीं भय का प्रतीक है, तो कहीं सौभाग्य और समृद्धि का।
ड्रैगन की कहानी केवल एक राक्षस की नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के डर, आस्था और कल्पना की संयुक्त गाथा है।
सर्प से ड्रैगन तक का सफर
“ड्रैगन” शब्द की जड़ें प्राचीन यूनान में मिलती हैं। यूनानी शब्द ड्राकोन (drakōn) का अर्थ था—एक बड़ा सर्प। शुरुआती दौर में ड्रैगन किसी पंखधारी दानव से अधिक, एक विशाल और खतरनाक सांप के रूप में ही देखा जाता था। समय के साथ उसकी आकृति बदलती गई—पंख जुड़े, आग की साँस आई और वह किंवदंतियों का सबसे प्रभावशाली जीव बन गया।
बुराई का प्रतीक: पश्चिमी दुनिया का ड्रैगन
मध्य पूर्व और यूरोप में ड्रैगन को अक्सर अंधकार और विनाश का प्रतीक माना गया।
मिस्र की कथाओं में अपेपी (Apepi) नामक विशाल सर्प अंधकार की दुनिया का देवता था।
ईसाई परंपरा में ड्रैगन को पाप और बुतपरस्ती से जोड़ा गया। चित्रों में संतों को ड्रैगन को अपने पैरों तले कुचलते हुए दिखाया गया—मानो अच्छाई बुराई पर विजय पा रही हो।
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यूरोपीय मध्यकालीन कथाओं में ड्रैगन आमतौर पर:
- पंखों वाला
- काँटेदार पूँछ वाला
- आग उगलने वाला
भयानक प्राणी था, जिसे मारना वीरता की पराकाष्ठा माना जाता था।
शक्ति और संरक्षण: पूर्वी दुनिया का ड्रैगन
लेकिन जैसे ही हम एशिया की ओर बढ़ते हैं, ड्रैगन का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है।
चीन में ड्रैगन को लुंग (Lung) कहा जाता है और वह:
- सौभाग्य
- वर्षा
- शक्ति
- सम्राट की दिव्यता
का प्रतीक है। चीनी दर्शन में ड्रैगन यांग का प्रतिनिधित्व करता है—आकाश, ऊर्जा और पुरुष तत्व। सदियों तक ड्रैगन चीनी सम्राटों का राजचिह्न रहा और 1911 तक वह चीन के राष्ट्रीय ध्वज पर भी अंकित था।
जापान में यही ड्रैगन र्यु (Ryū) या तात्सु (Tatsu) कहलाया, जिसे आकार बदलने और अदृश्य होने की शक्ति प्राप्त थी। आश्चर्य की बात यह है कि चीनी और जापानी ड्रैगन प्रायः बिना पंखों के होते हैं, फिर भी उन्हें आकाश और प्रकृति की शक्तियों का स्वामी माना जाता है।
युद्ध, ध्वज और राजचिह्नों में ड्रैगन
ड्रैगन केवल कथाओं तक सीमित नहीं रहा। उसकी भयावह और रक्षक छवि के कारण उसे युद्ध का प्रतीक भी बनाया गया।
- होमर की इलियड में राजा एगामेम्नॉन की ढाल पर तीन सिर वाला सर्प अंकित था।
- नॉर्स योद्धा अपनी ढालों पर ड्रैगन बनाते और जहाजों की नोक पर ड्रैगन के सिर तराशते थे।
- इंग्लैंड में नॉर्मन विजय से पहले ड्रैगन शाही युद्ध-ध्वज का प्रमुख चिन्ह था, जिसे किंवदंती के अनुसार उथर पेंड्रैगन, राजा आर्थर के पिता, ने स्थापित किया था।
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Dragon Mythology (image Social Media))
मिथक से यथार्थ तक
हालाँकि ड्रैगन का कोई वैज्ञानिक (zoological) अस्तित्व नहीं है, फिर भी यह नाम वास्तविक जीवों को भी मिला।
- लैटिन में Draco नाम कुछ छोटी छिपकलियों के लिए प्रयोग होता है।
- प्रसिद्ध कोमोडो ड्रैगन—इंडोनेशिया में पाया जाने वाला विशाल मॉनिटर लिज़र्ड—अपने डरावने रूप के कारण इस नाम से जाना गया।
ड्रैगन केवल एक काल्पनिक प्राणी नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का दर्पण है।
पश्चिम में वह हमारे डर और पाप का प्रतीक बना,
तो पूर्व में वह शक्ति, संतुलन और सौभाग्य का देवता।
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शायद इसी कारण ड्रैगन आज भी कहानियों, फिल्मों, त्योहारों और कल्पनाओं में जीवित है—
कभी आग उगलता राक्षस बनकर,
तो कभी आकाश में उड़ता हुआ दिव्य संरक्षक।
ड्रैगन अमर है—क्योंकि वह हमारी कल्पना में सांस लेता है।








