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Ayurvedic Health Guide: बार-बार छींक, पाचन और इम्यूनिटी

Ayurvedic Health Guide: छींक, पाचन और इम्यूनिटी: बदलते मौसम में शरीर क्या संकेत दे रहा है?

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में शरीर अक्सर ऐसे संकेत देता है, जिन्हें हम मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। बार-बार छींक आना, पेट भारी रहना, नींद न आना या जल्दी थक जाना—ये सब सामान्य नहीं, बल्कि शरीर के भीतर चल रहे असंतुलन की चेतावनी हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलता मौसम, बढ़ता प्रदूषण और बिगड़ती दिनचर्या इन समस्याओं की बड़ी वजह बन रही है।

अच्छी बात यह है कि भारतीय जीवनशैली और आयुर्वेद में इनके समाधान पहले से मौजूद हैं—बस ज़रूरत है उन्हें समझने और अपनाने की।

बार-बार छींक: सर्दी नहीं, एलर्जी का संकेत

अक्सर लोग मान लेते हैं कि छींक आ रही है तो ज़रूर सर्दी लग गई होगी। लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि अगर छींक लगातार या बार-बार आ रही है, तो यह एलर्जी हो सकती है, जिसे एलर्जिक राइनाइटिस कहा जाता है।

सर्दियों में हवा शुष्क हो जाती है, नाक की अंदरूनी नमी कम हो जाती है और धूल-धुएं के कण सीधे असर करने लगते हैं। यही कारण है कि सुबह उठते ही या रात में छींक तेज़ हो जाती है।

किन वजहों से बढ़ती है समस्या?

  • ठंडी और सूखी हवा

  • प्रदूषण, धूल और धुआं

  • पराग कण

  • एसी या हीटर की हवा

क्या-क्या लक्षण दिखते हैं?

  • एक साथ कई छींकें

  • नाक और आंखों से पानी

  • नाक में खुजली

  • सिर भारी रहना

  • रात में सांस लेने में दिक्कत

अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही समस्या आगे चलकर साइनस या सांस की बीमारी में बदल सकती है।

राहत के आसान तरीके

नाक को ठंडी हवा से बचाएं, सुबह-शाम भाप लें, रात में नाक में तिल या अणु तेल की दो बूंद डालें। हल्दी वाला दूध और धूप में बैठना भी शरीर को अंदर से मज़बूत करता है।

पाचन सही तो शरीर सही: नाशपाती का रोल

आयुर्वेद में पाचन को सेहत की जड़ माना गया है। अगर पेट ठीक है, तो शरीर खुद ही बीमारियों से लड़ने लगता है। इसी संदर्भ में नाशपाती एक बेहद उपयोगी फल है।

नाशपाती को आयुर्वेद में अमृतफल कहा गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को संतुलन देती है।

https://x.com/SukritBhatia1/status/1999762052580360441?s=20

नाशपाती क्यों फायदेमंद है?

  • फाइबर से भरपूर

  • कब्ज और अपच में राहत

  • पेट देर तक भरा रहता है

  • ब्लड शुगर धीरे बढ़ती है

  • दिल की सेहत के लिए बेहतर

हालांकि, सर्दी-जुकाम या बुखार में इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कफ बढ़ा सकता है।

जायफल: कम मात्रा, बड़ा असर

रसोई में रखा जायफल अक्सर मिठाइयों तक सीमित रह जाता है, लेकिन आयुर्वेद में इसे औषधि माना गया है। जायफल दिमाग को शांत करता है और पाचन को बेहतर बनाता है।

रात में गुनगुने दूध में एक चुटकी जायफल नींद को बेहतर बनाता है। गैस, पेट फूलना और अपच में भी यह कारगर है।
ध्यान रखें—ज्यादा जायफल नुकसानदायक हो सकता है।

https://tesariaankh.com/india-new-zealand-fta-luxon-statement-analysis/

जीरा पानी: साधारण लेकिन असरदार

जीरा हर भारतीय रसोई में होता है, लेकिन उसका पानी शरीर के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं।

जीरा पानी क्या करता है?

  • पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है

  • गैस और कब्ज कम करता है

  • इम्यूनिटी बढ़ाता है

  • शरीर को डिटॉक्स करता है

  • त्वचा और बालों को फायदा देता है

सुबह खाली पेट गुनगुना जीरा पानी पीना सबसे ज़्यादा असरदार माना जाता है।

सर्दियों में लेमन ग्रास टी: गर्माहट और ताजगी

ठंड के मौसम में लेमन ग्रास टी शरीर को अंदर से गर्म रखती है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है। इसकी खुशबू तनाव कम करती है और थकान दूर करती है।

पाचन की समस्या, सर्दी-जुकाम और जोड़ों के दर्द में यह हर्बल टी खास फायदेमंद मानी जाती है। दिन में 1-2 कप पर्याप्त हैं।

बीमारी के हिसाब से दाल का चुनाव

हर दाल का असर एक-सा नहीं होता।

  • डायबिटीज: मूंग, मसूर, चना दाल

  • हाई ब्लड प्रेशर: मूंग और मसूर

  • दिल की सेहत: चना और मसूर

  • कमजोर पाचन: मूंग दाल

  • थकान और कमजोरी: अरहर और उड़द

दालें तब ज़्यादा फायदेमंद होती हैं, जब उनमें तेल और नमक संतुलित मात्रा में हो।

शरीर हमें रोज़ संकेत देता है—बस हम सुनना नहीं चाहते। छींक, गैस, थकान या नींद की कमी—all are warnings.
आयुर्वेद, सही खान-पान और थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर हम दवाओं पर निर्भर हुए बिना भी खुद को स्वस्थ रख सकते हैं।

सेहत का राज किसी महंगे इलाज में नहीं, बल्कि रोज़ की आदतों में छिपा है।

नोटः यह बातें सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से हैं। सेवन करने वाले एक्सपर्ट से सलाह लें

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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