कोलकाता। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने IIM कोलकाता में कहा कि दुनिया ऐसी स्थिति में प्रवेश कर रही है जहां राजनीति अर्थव्यवस्था पर हावी होती जा रही है। यह कथन आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए गंभीर बहस का विषय है, क्योंकि पिछले एक दशक में अक्सर यह देखने को मिला है कि अर्थव्यवस्था राजनीति को मजबूर कर रही है, न कि राजनीति अर्थव्यवस्था को।
आपके प्रश्न इसी विरोधाभास को रेखांकित करते हैं:
- क्या राजनीति मजबूत हो रही है या अर्थव्यवस्था अधिक निर्णायक है?
- विश्व युद्धों के उदाहरण किस ओर इशारा करते हैं?
- वर्तमान वैश्विक शक्ति-संतुलन में यह कथन कितना सही बैठता है?
आइए इसे चरणबद्ध तरीके से समझते हैं।
1. जयशंकर का कथन: “राजनीति अर्थव्यवस्था पर हावी” — इसका वास्तविक संदर्भ क्या है?
जयशंकर का संकेत बाजार शक्ति या GDP ग्रोथ पर नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के उस दौर पर है:
- जहां राजनीतिक निर्णय आर्थिक परिणामों को पुनः परिभाषित कर रहे हैं,
- और आर्थिक नीतियों को भू-राजनीतिक रणनीतियों के अनुरूप ढाला जा रहा है।
उदाहरण:
- अमेरिका द्वारा टिकटॉक बैन,
- Huawei पर प्रतिबंध,
- चिप एक्सपोर्ट कंट्रोल,
- रूस पर प्रतिबंध,
- भारत-ऑस्ट्रेलिया-Japan का सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव,
सब आर्थिक नीतियाँ हैं, पर प्रेरणा राजनीतिक और रणनीतिक है।
यानी आज इकॉनॉमिक टूल्स = जियोपॉलिटिकल हथियार।
2. क्या इतिहास कहता है कि अर्थव्यवस्था राजनीति पर हमेशा भारी रही है?
✔️ दोनों विश्व युद्ध इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं
- जर्मनी की आर्थिक मंदी → हिटलर का उदय
- संसाधनों की वैश्विक दौड़ → युद्ध
- अमेरिका ने हथियार उत्पादन बनी अर्थव्यवस्था पर राजनीतिक रणनीति को आधारित किया
यहां आर्थिक हित राजनीतिक निर्णयों की वाहक बने।
✔️ शीत युद्ध में भी यही हुआ
- हथियारों की होड़ आर्थिक सामर्थ्य की प्रतिस्पर्धा थी।
- USSR आर्थिक रूप से कमजोर हुआ → राजनीतिक ढांचा ढह गया।
यहां भी अर्थव्यवस्था निर्णायक निकली।
निष्कर्ष:
इतिहास बताता है कि लंबी अवधि में आर्थिक शक्ति का प्रभाव अधिक स्थायी और निर्णायक होता है।
3. वर्तमान में भी अर्थव्यवस्था राजनीति को मजबूर कर रही है — आपके उदाहरण बिल्कुल सटीक
🇺🇸 डोनाल्ड ट्रम्प का स्टैंड बदलना — आर्थिक दबाव का सटीक उदाहरण
- अमेरिकी किसानों पर नुकसान
- महंगाई का दबाव
- उपभोक्ताओं पर लागत बढ़ना
आख़िरकार:
➡️ ट्रम्प ने चीन के साथ व्यापार समझौते में अपने कठोर रुख को नरम किया।
यह साफ संकेत है कि राजनीति को आर्थिक वास्तविकताओं के सामने झुकना पड़ता है।
🌍 दुनिया का वास्तविक संचालन — अर्थव्यवस्था आधारित
- IMF, World Bank, WTO
- डॉलर का वैश्विक प्रभुत्व
- सप्लाई चेन का राजनीतिक निर्णयों पर प्रभाव
- तेल की कीमतें → वैश्विक रणनीतियाँ निर्धारित करती हैं
यह सब दिखाता है कि अर्थव्यवस्था राजनीति को लगातार नियंत्रित कर रही है।
4. फिर जयशंकर क्या संकेत दे रहे हैं? — असल मायने समझिए
जयशंकर का कथन वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता पर आधारित है, जहां—
राजनीति स्थिर अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर रही है:
- रूस-यूक्रेन युद्ध → ऊर्जा संकट
- अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा → सप्लाई चेन तनाव
- वैश्वीकरण का रुकना → व्यापार में बाधाएँ
- प्रतिबंधों का दौर → आर्थिक निर्णय राजनीतिक हथियार
यानी,
आज जोखिम राजनीति पैदा कर रही है, दर्द अर्थव्यवस्था झेल रही है।
उनका मुख्य संदेश है:
🔹 “आर्थिक फैसले अब राजनीतिक दृष्टिकोण से तय हो रहे हैं।”
🔹 “देश सुरक्षा और सप्लाई के लिहाज से नए विकल्प ढूंढ रहे हैं।”
5. क्या यह किसी बड़े खतरे का संकेत है?
हाँ — और यह तीन स्तरों पर दिखाई देता है:
https://tesariaankh.com/national-herald-case-fir-sonia-rahul-2025-full-report/
(1) अनिश्चितता का बढ़ना
राजनीतिक विवाद → सप्लाई चेन टूटना
युद्ध → ऊर्जा संकट
प्रतिबंध → व्यापार में बाधा
(2) टेक्नोलॉजी का राजनीतिक हथियार बनना
- सेमीकंडक्टर
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- 5G
सब राजनीतिक नियंत्रण के साधन बन चुके हैं।
(3) आर्थिक ध्रुवीकरण
- अमेरिका बनाम चीन
- यूरोप बनाम रूस
- वैश्विक दक्षिण बनाम पश्चिम
आर्थिक ब्लॉक बन रहे हैं — यह पुरानी स्थिर वैश्विक व्यवस्था के अंत की घोषणा है।
https://x.com/SagarPurohit06/status/1995012362924167598?s=20
6. क्या जयशंकर का आकलन सही है? — दो-स्तरीय निष्कर्ष
✔️ कथन आंशिक रूप से सही है — क्योंकि:
- भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक चक्र को बाधित कर रहे हैं।
- सप्लाई चेन अब सुरक्षा–राजनीति के आधार पर तय हो रही है।
- आर्थिक नीतियाँ राजनीतिक प्राथमिकताओं से संचालित हो रही हैं।
✔️ कथन आंशिक रूप से अधूरा है — क्योंकि:
- राजनीति आज भी आर्थिक दबाव के सामने टिक नहीं पाती।
- ट्रम्प, यूरोप, चीन — हर जगह अर्थव्यवस्था राजनीतिक निर्णयों को मजबूर कर रही है।
- लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था ही राजनीति की दिशा तय करती है।
इसलिए यह एक दो-तरफ़ा खेल है, लेकिन निर्णायक शक्ति अभी भी आर्थिक ही है।
7. भारत पर इसका क्या असर?
जयशंकर का संकेत स्पष्ट है:
- भारत को सप्लाई चेन विविध करनी है
- Make in India को मजबूत करना है
- वैश्विक जोखिमों के लिए खुद को तैयार रखना है
- न तो चीन पर निर्भर होना है, न अमेरिका पर
भारत अवसर भी देख रहा है और खतरे भी
जयशंकर चेतावनी दे रहे हैं कि राजनीति वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर रही है। लेकिन ऐतिहासिक और वर्तमान उदाहरण दिखाते हैं कि अर्थव्यवस्था अंततः राजनीति को नियंत्रित करती है। वर्तमान व्यवस्था में दोनों के बीच टकराव बढ़ रहा है—और यही वैश्विक अस्थिरता का सबसे बड़ा कारण है। भारत इस दौर में अपने लिए रणनीतिक स्पेस तलाश रहा है, और यह बिना आर्थिक शक्ति के संभव नहीं।








