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माघ मेला प्रयागराज 2026: तैयारियाँ, बजट, सुरक्षा और प्रशासनिक प्लान

माघ-मेला—प्रयागराज में भक्ति व श्रद्धा का पवित्र संगम — 2026 में फिर से सजने को है। राज्य व मेला-प्राधिकरण ने ₹120 करोड़ के प्रस्ताव के साथ 800 हेक्टेयर क्षेत्र, सड़क-संरचना, जल-बिजली, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सुविधाओं की तैयारी शुरू कर दी है। पूर्व 1954 की भगदड़ जैसी त्रासदियों को भुलाया नहीं जा सकता — इसलिए इस बार डिजिटल निगरानी, ड्रोन-सर्विलांस, विस्तृत रूट प्लानिंग, और स्वच्छता व आपातकालीन व्यवस्थाओं का जाल तैयार किया गया है। वैसे माघ-मास, पवित्र स्नान, सत्संग और आत्म-शुद्धि का पर्व है। हर श्रद्धालु का मन प्रभु-भक्ति और मोक्ष-अभिलाषा से ओत-प्रोत होता है। लेकिन जब लाखों हृदय एक साथ संगम तट पर आते हैं, तो भक्ति के साथ-साथ हमारी ज़िम्मेदारी बन जाती है — कि हम सभी सुरक्षित, सुव्यवस्थित और मानवता के दृष्टिकोण से सोचें। इस रिपोर्ट में, हमने इस पवित्र आयोजन की तैयारियाँ, बजट, इतिहास, संभावित जोखिम और सावधानियों को विस्तार से लिया है — ताकि श्रद्धा बन सके सुरक्षित-श्रद्धा।

सरकारी बजट व वित्तीय पृष्ठभूमि

प्रयागराज माघ-मेला 2026 के लिए प्रशासन व मेला प्राधिकरण ने राज्य सरकार को ₹120 करोड़ का बजट प्रस्ताव भेजा है, ताकि मेला क्षेत्र का विस्तार, आधारभूत सुविधाएँ और भीड़-प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सके। हालाँकि, मीडिया रिपोर्टों में पहले भी बड़े आयोजन (जैसे Maha Kumbh 2025) के लिए करोड़ों रुपये के बजट का जिक्र हुआ था — उदाहरण स्वरूप, कुंभ 2025 के लिए ₹5,435.68 करोड़ का कुल बजट बताया गया था, जिसे कई सौ विकास परियोजनाओं में बाँटा गया था। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य व केंद्र स्तर पर धार्मिक मेलों, तीर्थ-यात्राओं और तीर्थ-पर्यटन को बड़े पैमाने पर महत्व दिया जाता है — और मेला व धार्मिक पर्यटन के लिए उचित निवेश भी किया जा रहा है।

प्रमुख तैयारियाँ — क्या क्या हो रहा है इस बार?

  • मेला क्षेत्र का विस्तार और लेआउट: इस साल मेला क्षेत्र लगभग 800 हेक्टेयर में विस्तारित किया गया है। क्षेत्र को सेक्टर व सब-सेक्टर में बाँटा गया है ताकि भीड़-प्रबंधन बेहतर हो सके।
  • सड़क, संचार, जल–बिजली, बुनियादी सुविधाएँ: मेला एरिया की सड़कों का काम हुआ है — पहले 12 सड़कों के लिए ₹23.48 करोड़ की मंजूरी मिली थी, जिनमें से अधिकांश कार्य शुरू भी हो चुके हैं।
  • स्वच्छता, शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएँ: पिछले कुंभ के अनुभव से सीखते हुए — स्वच्छता, शौचालय, कूड़ा-निपटान, फोर्टेबल स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
  • डिजिटल निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाएँ: इस बार अधिक आधुनिक तंत्र जैसे CCTV, ड्रोन, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, सेक्टर-वाइज कंट्रोल को ध्यान में रखा गया है ताकि भीड़-प्रबंधन, आपातकालीन सेवा, जल-सुरक्षा और सम्पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। (न्यूज़ रिपोर्ट अनुसार 1,400+ CCTV, ड्रोन, विशेष सुरक्षा बल आदि लगाया जा रहा है)
  • यातायात व लोग-आवागमन: मुख्य स्नान-तिथियों पर बस-सेवाओं, शटल-बस या सार्वजनिक परिवहन की विशेष व्यवस्था की जाएगी — ताकि निजी वाहनों का बंदोबस्त कम हो। (विशेष बस सेवा योजना पर मीडिया रिपोर्ट सामने आई है)
  • आपात-सेवाएँ व राहत-प्रबंध: मेडिकल टीम, एम्बुलेंस, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अग्नि-सुरक्षा, जल-निगरानी (जलस्तर व नदी-तट) — ये सभी व्यवस्थाएँ इस बार विशेष रूप से तैयार की जा रही हैं।
  • प्रशासनिक समन्वय: मेला प्राधिकरण, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, पर्यटन व ट्रैफिक विभाग — सभी विभागों ने इस आयोजन के लिए काम शुरू कर दिया है।

इतिहास से चेतावनी — 1954 की भगदड़ और उससे सीखे सबक

धार्मिक आयोजनों में भक्ति जितनी पवित्र होती है, उतनी ही सतर्कता की ज़रूरत होती है। 3 फ़रवरी 1954 को प्रयाग (तत्कालीन इलाहाबाद) में हुए कुंभ/मेला के दौरान एक भयावह भगदड़ हुई थी — जब श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक बढ़ने से घाट/पुल-रास्ते असहाय हो गए थे। इस घटना में कई सैकड़ों लोग मारे गए थे, और हजारों घायल हुए। इस त्रासदी ने हमें यही सिखाया कि बड़े मेलों में — चाहे स्नान हो, पूजा-अनुष्ठान हो या तीर्थ-यात्रा — भीड़-नियंत्रण, गहन योजना, सुरक्षित रूट-मैनेजमेंट और त्वरित आपातकालीन प्रबंध के बिना, भक्ति भी महामारी या मर्मान्तक हादसे में बदल सकती है। इसलिए, 1954 जैसी त्रासदी को दोबारा न होने देना — यह सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, हर श्रद्धालु, साधु-संघ, स्थानीय लोग और स्वयंसेवी संगठन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

श्रद्धालुओं के लिए सुझाव — श्रद्धा के साथ सतर्कता

  1. समूह में रहें — अकेले न जाएँ। खासकर स्नान-दिवस पर अकेले चलना जोखिम-भरा हो सकता है; परिवार/मित्रों के साथ रहें।
  2. मुख्य निकासी मार्ग, पुलिस/मेडिकल पोस्ट पहले पहचानें। घाट पर पहुँचने पर एंट्री-रूट, निकासी मार्ग और नज़दीकी हेल्प-डेस्क देख लें।
  3. जरूरत पड़ने पर तुरंत निकासी लें। भीड़-घनत्व ज़्यादा दिखे, दबाव हो, धक्का-मुक्की हो — तो जल्द ही किनारे हटें और संयमित रहें।
  4. बच्चों, बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को हाथ में पहचान-बैंड या टैग दें, बुजुर्गों को आरामदायक जूते व पर्याप्त पानी दें।
  5. पानी, हल्का खाना, प्राथमिक दवाई, मोबाइल व संपर्क जानकारी साथ रखें। निर्जलीकरण, थकावट, अस्वस्थता — ये प्रमुख खतरें हैं।
  6. प्रशासन या स्वयंसेवी निर्देशों का पालन करें। भीड़-मैनेजमेंट टीम, पुलिस, स्वयंसेवक, हेल्प-डेस्क — उनके निर्देशों का सम्मान करें।
  7. मूल्यवान वस्तु, दस्तावेज़ और भारी सामान साथ लेकर न जाएँ। भीड़ में ठहरना मुश्किल हो सकता है; यात्रा एवं वापसी सुगम रखें।

आयोजकों / प्रशासन के लिए चेक-लिस्ट / सुझाव

  • रेयल-टाइम भीड़-निगरानी — ड्रोन + CCTV + स्मार्ट-मैपिंग।
  • स्पष्ट, चौड़ी, एकतरफ़ा मार्ग + अलग-एंट्री/एग्ज़िट और इवॅक्यूएशन रूट।
  • हर सेक्टर में फर्स्ट-एड, एम्बुलेंस, अग्नि-सुरक्षा।
  • स्वच्छता, शौचालय, जल-पेय, कचरा निपटान — विशेष ध्यान।
  • पुलिस + स्वयंसेवक + स्थानीय समुदाय का समन्वय।
  • जन-जागरूकता — श्रद्धालुओं को पहले से सूचना दें: सुरक्षित व्यवहार, सम्पर्क-सूचना, बचाव-स्थान।
  • पर्याप्त पानी, शेड/छाया, विश्राम-स्थान — ताकि भक्त आराम से श्रद्धा कर सकें।
https://x.com/prakashdips/status/1993931491525693755?s=20

माघ-मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं — श्रद्धा, विश्वास और मानवता का संगम है। इस पवित्रता को बचाए रखने के लिए बजट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक तैयारियाँ ज़रूरी हैं, लेकिन असली सुरक्षा — हमारी जागरूकता, संयम और सहयोग में है। 1954 की भगदड़ ने हमें सिखाया है कि चाहे आस्था कितनी भी गहरी हो — बिना सुनियोजित व्यवस्था, भीड़-नियंत्रण और सतर्कता के, भक्ति itself ख़तरे में पड़ सकती है।

https://tesariaankh.com/masik-durgashtami-2024-significance-rituals-date-timings/

इस बार, अगर हम सब श्रद्धालु, प्रशासन, स्थानीय लोग और स्वयंसेवी — मिलकर जिम्मेदारी निभाएँ, तो यह मेला न सिर्फ भक्ति का पर्व बनेगा, बल्कि सुरक्षित-श्रद्धा का भी प्रतीक बनेगा।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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