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भारत में ब्लू जोन्स की राह: लंबी उम्र का नया सूत्र

दुनिया के नक्शे पर पांच ऐसे स्थान मौजूद हैं, जहां लोग विश्व औसत से 12–15 वर्ष अधिक जीते हैं। इन्हें ब्लू जोन्स कहा जाता है—जापान का ओकिनावा, इटली का सार्डिनिया, कोस्टा रिका का निकोया प्रायद्वीप, ग्रीस का इकारिया द्वीप और अमेरिका का लोमा लिंडा समुदाय। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग न केवल लंबे समय तक जीवित रहते हैं, बल्कि जीवनभर सक्रिय, मानसिक रूप से स्वस्थ और तनावमुक्त रहते हैं।

डब्ल्यूएचओ की 2025 रिपोर्ट बताती है कि इन क्षेत्रों में दीर्घायु का राज सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन-दर्शन है।
ओकिनावा में लोग “इकिगाई”—जीने का मकसद—के साथ दिन की शुरुआत करते हैं। यह मानसिक संतुलन तनाव को सीमित रखता है और शरीर के हार्मोनल सिस्टम को स्थिर करता है।

इटली के सार्डिनिया में प्लांट-बेस्ड मेडिटेरेनियन डाइट, जैतून का तेल, ताजे फल-सब्जियां और सीमित मीट उनके स्वास्थ्य का आधार है। ग्रीस के इकारिया में हर्बल चायें—थाइम, रोजमेरी, सेज—प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेट्री मानी जाती हैं, जिससे डिप्रेशन और डिमेंशिया का खतरा बेहद कम रहता है।

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सभी ब्लू जोन्स में एक बात समान है—सोशल कनेक्शन। लोग अकेले नहीं रहते, बल्कि परिवार, पड़ोस और दोस्तों से जुड़कर जीवन जीते हैं। लोमा लिंडा में हर शनिवार को “रेस्ट डे” मनाकर काम से दूर रहकर परिवार और प्रकृति के साथ समय बिताया जाता है।

भारत ब्लू जोन्स की राह कैसे अपना सकता है?

भारत में पारंपरिक जीवनशैली पहले से ही कई ब्लू जोन सिद्धांतों से मेल खाती है। कुछ छोटे बदलाव लंबे जीवन का बड़ा आधार बन सकते हैं:

1. भोजन में प्लांट-बेस्ड अप्रोच

भारतीय रसोई में दाल, सब्जियां, मोटे अनाज, देसी घी और मौसमी फल स्वाभाविक रूप से शामिल हैं। जंक फूड, अतिरिक्त तेल और चीनी कम कर हम आसानी से मेडिटेरेनियन शैली जैसी डाइट अपना सकते हैं।

2. ‘इकिगाई’ जैसा जीवन उद्देश्य अपनाएं

योग, ध्यान, भजन-संकीर्तन, सामाजिक सेवा जैसे भारतीय अभ्यास मानसिक शांति देते हैं। इन्हें दैनिक रूटीन में शामिल करने से तनाव कम होता है।

3. रोज कम से कम 5–7 हजार कदम चलने की आदत

लिफ्ट की जगह सीढ़ियां, पास की दूरी पैदल तय करना और घरेलू काम खुद करना—ये ब्लू जोन का सबसे सरल और प्रभावी नियम है।

4. परिवार और समुदाय के साथ समय

संयुक्त परिवार, त्योहार, मोहल्ले की गतिविधियां—ये भारत की ताकत हैं। इन्हें समय देना मानसिक स्वास्थ्य और लंबी उम्र दोनों के लिए फायदेमंद है।

5. ‘स्लो लिविंग’ को अपनाएं

तेजी से भागती जिंदगी में दिन का एक हिस्सा मोबाइल-फ्री या डिजिटल-डिटॉक्स का रखें। यह शरीर और दिमाग दोनों को राहत देता है।

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डब्ल्यूएचओ अब ब्लू जोन मॉडल को शहरी नीति में शामिल करने पर विचार कर रहा है। भारत अगर इन जीवनशैली सिद्धांतों को अपनाए, तो अपने शहरों और गांवों में “इंडियन ब्लू जोन्स” बनाना बिल्कुल संभव है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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