Sweet Revolution: भारत में इन दिनों ‘मीठी क्रांति’ (Sweet Revolution) का शोर है। यह क्रांति, जो कि राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (NBHM) के जरिए लाई जा रही है, न केवल देश के शहद उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में भी मिठास घोल रही है।
केंद्र सरकार की यह महत्त्वाकांक्षी पहल, जो कि 500 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ वर्ष 2025-26 तक क्रियान्वित की जा रही है, देश को शहद उत्पादन और निर्यात में दुनिया का सिरमौर बनाने की ओर अग्रसर है।
उपलब्धियाँ जो दुनिया को चमका रही हैं
भारत ने मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में शानदार प्रगति की है, जिसके आंकड़े स्वयं कहानी बयां करते हैं:
उत्पादन में उछाल: वर्ष 2024 में देश ने लगभग 1.4 लाख मीट्रिक टन प्राकृतिक शहद का उत्पादन किया।
निर्यात में रिकॉर्ड: 2023-24 में, भारत ने 1.07 लाख मीट्रिक टन शहद का निर्यात किया, जिसका कुल मूल्य 177.55 मिलियन डॉलर रहा।
वैश्विक मंच पर पहचान: भारत जो वर्ष 2020 में दुनिया का 9वां सबसे बड़ा शहद निर्यातक था, वह अब चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहद निर्यातक बन चुका है।
प्रमुख निर्यातक देश: भारतीय शहद की मांग अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और लीबिया जैसे देशों में है।
यह उछाल बताता है कि मधुमक्खी पालन अब केवल एक शौकिया गतिविधि नहीं, बल्कि एक उच्च तकनीक-आधारित व्यावसायिक उद्यम बन गया है।
NBHM: तीन ‘मिनी मिशन’ की ताकत
राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) द्वारा क्रियान्वित यह मिशन, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के बैनर तले तीन स्तंभों (मिनी मिशन) पर खड़ा है:
1. एमएम 1 (उत्पादकता): वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और **परागन क्रिया** को बढ़ावा देना, जिससे फसल उत्पादन और उत्पादकता में सुधार हो।
2. एमएम 2 (पोस्ट-प्रोडक्शन): शहद संग्रहण, प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग और विपणन के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करना।
3. एमएम 3 (शोध और तकनीक): देश की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल शोध, विकास और प्रौद्योगिकी उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करना।
अन्य प्रमुख उद्देश्य:
क्वालिटी कंट्रोल: शहद की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाएं स्थापित करना। अब तक 6 विश्वस्तरीय शहद जाँच केंद्र और 47 मिनी लैब स्वीकृत किए गए हैं।
बुनियादी ढांचा: 26 शहद प्रसंस्करण इकाइयाँ, 12 मधुमक्खी पालन उपकरण इकाइयाँ, और 18 संग्रहण-विपणन इकाइयाँ स्वीकृत की गई हैं।
आईटी का उपयोग: पारदर्शिता के लिए मधु क्रांति पोर्टल की शुरुआत की गई है, जहाँ 14,859 मधुमक्खी पालकों और 298 शहद उत्पादक संघों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जा चुका है।
व्यावसायिकता: 100 किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाए गए हैं, जो मधुमक्खी पालकों को विपणन के लिए ट्राइफेड, नाफेड और एनडीडीबी जैसी संस्थाओं से जोड़ते हैं।
सफलता की कहानियाँ: मीठे उद्यम की प्रेरणा
NBHM का असली प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है, जहाँ यह किसानों और महिलाओं को सशक्त बना रहा है।
1. मेघालय का पारंपरिक जुनून
मेघालय के नोंगथाईममयी गाँव में मधुमक्खी पालन एक पुरानी परंपरा रही है। श्री स्टीवेंसन शादप ने इसे एक जुनून के रूप में लिया और प्रशिक्षण के बाद अपनी कॉलोनी का विस्तार किया। आज वह केवल शहद बेचकर नोंगपोह और शिलांग के बाजार से सालाना 1 से 2 लाख रुपये कमाते हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर, पूरा समुदाय अब एक मधुमक्खी सोसाइटी बनाने की तैयारी कर रहा है, जो उत्पादन, पैकेजिंग और मार्केटिंग को संगठित करेगी।
2. जम्मू-कश्मीर का ज़ाकिर हुसैन मॉडल
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में, ज़ाकिर हुसैन भट ने 5 मधुमक्खी कालोनियों से शुरुआत करके अब उनकी संख्या 200 तक पहुंचा दी है। उनका उद्यम सालाना 200 क्विंटल शहद का उत्पादन करता है और कई स्थानीय लोगों को रोजगार देता है।
प्रशासनिक सहायता से यहाँ 500 किसान हर साल 480 क्विंटल ऑर्गेनिक शहद तैयार कर रहे हैं, जिसका कुल कारोबार 3 करोड़ रुपये से अधिक है।
सरकार अब इस उत्पाद को ‘कुपवाड़ा ऑर्गेनिक शहद’ के नाम से GI टैग दिलाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे इसका मूल्य और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बढ़ेगी।
महिलाओं का सशक्तिकरण
NBHM नारी सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम भी बन रहा है। देश के विभिन्न राज्यों में महिला स्व-सहायता समूहों (SHG), किसान उत्पादक संघों और सहकारी समूहों को इस मिशन में प्रमुखता से जोड़ा गया है। मधुमक्खी पालन जैसी कृषि-जनित गतिविधि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और घरेलू आय में योगदान देने का सीधा अवसर प्रदान करती है।
भविष्य की राह
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन भारत की कृषि नीति का एक दूरदर्शी हिस्सा है। यह न केवल कृषि क्षेत्र में परागन के माध्यम से विविधीकरण को बढ़ावा देता है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले शहद और मोम, रॉयल जेली, बी-वेनम जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों के व्यापार को भी आसान बनाता है। यह मिशन पारंपरिक मधुमक्खी पालन को एक वैज्ञानिक और संगठित उद्योग में बदलकर, भारत के ग्रामीण विकास और निर्यात बाज़ार के लिए मीठी क्रांति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
निश्चित रूप से। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (NBHM) की सफलता में प्रमुख राज्यों का योगदान महत्वपूर्ण है।
यहाँ भारत के उन शीर्ष राज्यों की जानकारी दी गई है जो शहद के उत्पादन में अग्रणी हैं:
भारत में शहद उत्पादन के शीर्ष राज्य: कहाँ से आ रही है मीठी क्रांति की मिठास?
भारत की कृषि जलवायु परिस्थितियाँ मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं, जिससे कई राज्य बड़े पैमाने पर शहद का उत्पादन करते हैं। ये राज्य देश के कुल शहद उत्पादन में एक बड़ा हिस्सा योगदान करते हैं, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बनने में सफल हुआ है।
https://x.com/ncct_institutes/status/1813799770282197018
शहद उत्पादन में प्रमुख योगदान देने वाले शीर्ष राज्य (प्रतिशत योगदान के साथ) इस प्रकार हैं:
| क्रम संख्या | राज्य का नाम | कुल उत्पादन में अनुमानित प्रतिशत हिस्सेदारी |
| 1 | **उत्तर प्रदेश** | **17%** |
| 2 | **पश्चिम बंगाल** | **16%** |
| 3 | **पंजाब** | **14%** |
| 4 | **बिहार** | **12%** |
| 5 | **राजस्थान** | **9%** |
शहद की विविधता (फ्लोरल वैरायटी)
यह ध्यान देने योग्य है कि ये राज्य न केवल मात्रा में, बल्कि गुणवत्ता और विविधता में भी शहद का उत्पादन करते हैं। शहद की ये किस्में निर्यात बाजार में अत्यधिक मूल्यवान हैं:
उत्तर प्रदेश और पंजाब: मुख्य रूप से रेपसीड/सरसों शहद (Rapeseed/Mustard Honey) के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।
https://tesariaankh.com/shapit-gaav-sammu-diwali-horror-hamirpur-himachal/
अन्य क्षेत्र: यूक्लिप्टस शहद, लीची शहद, और सूरजमुखी शहद जैसी अन्य विशिष्ट वैरायटी का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
इन प्रमुख उत्पादक राज्यों में ही NBHM के तहत शहद प्रसंस्करण इकाइयाँ, गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाएँ और किसान उत्पादक संगठन (FPO) स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता को और बढ़ाया जा सके।








