Prince Andrew Epstein Scandal: ब्रिटेन का बकिंघम पैलेस—जो सदियों से शक्ति और परंपरा का प्रतीक रहा है—आजकल वहाँ सन्नाटा पसरा है, लेकिन दीवारें एक खामोश तूफान की गवाह हैं। मामला है किंग चार्ल्स III और उनके छोटे भाई, प्रिंस एंड्रयू का।
यह सिर्फ शाही प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं है; यह एक दुखद पारिवारिक गाथा है, जहाँ एक राजा को अपने ही भाई से उसका सबकुछ छीनना पड़ा, यहाँ तक कि उसका घर भी। किंग चार्ल्स ने हाल ही में प्रिंस एंड्रयू से उनके सभी बचे हुए शाही ख़िताब छीन लिए हैं और इससे भी बड़ी बात—उन्हें बकिंघम पैलेस से बेदखल होने का आदेश दिया है।
एक राजा का कठिन निर्णय
यह फैसला किंग चार्ल्स के लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद कठिन रहा होगा। यह दो भाइयों का मामला है, जिनके बीच निजी संबंध हमेशा से रहे होंगे। लेकिन अब चार्ल्स सिर्फ एक भाई नहीं, बल्कि राजतंत्र के मुखिया हैं। उनका सबसे बड़ा कर्तव्य है, राजशाही की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को बनाए रखना।
चार्ल्स ने यह कठोर एक्शन क्यों लिया?
- राजशाही की सुरक्षा: प्रिंस एंड्रयू से जुड़े विवाद ने लंबे समय से शाही परिवार पर एक काला साया डाल रखा था। चार्ल्स जानते हैं कि आधुनिक दुनिया में, अगर राजशाही को प्रासंगिक रहना है, तो उसे नैतिक रूप से बेदाग होना होगा। एंड्रयू का मामला राजशाही की नींव को हिला रहा था।
- सार्वजनिक छवि की क्षति: आम जनता इस मामले को लेकर आक्रोशित थी। एंड्रयू के ख़िताब और विशेषाधिकार जारी रखने का मतलब था, जनता की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करना। चार्ल्स ने कठोर फैसला लेकर यह संदेश दिया कि कानून और नैतिकता सबके लिए बराबर है, भले ही आप राजा के भाई क्यों न हों।
- लागत और बोझ: शाही परिवार को चलाने का खर्च करदाताओं पर आता है। विवादित प्रिंस पर शाही सुविधाएँ बनाए रखना एक अनावश्यक बोझ और जन-आलोचना का कारण बन रहा था।
संक्षेप में, यह किंग चार्ल्स का एक ‘डैमेज कंट्रोल’ ऑपरेशन था—एक अप्रिय, लेकिन आवश्यक सर्जरी।
प्रिंस एंड्रयू का ‘स्याह मामला’: जेफरी एपस्टीन कनेक्शन
प्रिंस एंड्रयू के इस निष्कासन की जड़ें एक बेहद गंभीर और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विवाद में हैं, जो अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से जुड़ा है।
- एपस्टीन से दोस्ती: प्रिंस एंड्रयू और जेफरी एपस्टीन की दोस्ती लंबे समय तक चली, यहाँ तक कि एपस्टीन पर यौन अपराधों के गंभीर आरोप लगने के बाद भी। शाही परिवार के लिए यह सबसे बड़ा ‘संबंधों का संकट’ था।
- वर्जीनिया गिफ्रे का आरोप: मामले का मुख्य केंद्र बिंदु थीं वर्जीनिया गिफ्रे, जिन्होंने प्रिंस एंड्रयू पर आरोप लगाया कि एपस्टीन ने उन्हें कम उम्र में प्रिंस एंड्रयू के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया था। प्रिंस एंड्रयू ने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया, लेकिन यह मामला उन पर हमेशा के लिए एक दाग बन गया।
- क़ानूनी निपटान: मामला अदालत तक पहुँचा। बदनामी और क़ानूनी लड़ाई से बचने के लिए, प्रिंस एंड्रयू को अंततः गिफ्रे के साथ अदालत के बाहर एक बड़ी राशि का क़ानूनी निपटान (Settlement) करना पड़ा। हालाँकि यह समझौता अपराध सिद्ध नहीं करता, लेकिन जनता ने इसे एक तरह से “दोष की स्वीकृति” के रूप में देखा।
- शाही भूमिका का अंत: इसी विवाद के कारण, रानी एलिजाबेथ द्वितीय (दिवंगत) ने पहले ही एंड्रयू से उनकी सैन्य उपाधियाँ और शाही संरक्षक पद वापस ले लिए थे।
बकिंघम पैलेस से बेदखली: एक दर्दनाक संदेश
किंग चार्ल्स के नए आदेश का मतलब है कि प्रिंस एंड्रयू अब बकिंघम पैलेस में अपना कार्यालय या आधिकारिक आवास नहीं रख सकते। यह सिर्फ एक मकान खाली करने का आदेश नहीं है; यह एक प्रतीकात्मक निष्कासन है।
इसका क्या मतलब है:
- कोई ख़िताब नहीं: उनसे उनके सभी आधिकारिक ख़िताब और विशेषाधिकार छीन लिए गए हैं। वह अब केवल ड्यूक ऑफ यॉर्क के रूप में जाने जाएंगे, जो एक वंशानुगत उपाधि है, न कि सक्रिय शाही भूमिका का प्रतीक।
- राजकोषीय कटौती: उन्हें शाही ख़ज़ाने से मिलने वाले लगभग सभी फंड और सुरक्षा व्यवस्था भी बंद कर दी जाएगी।
- पूरी तरह से निजी जीवन: एंड्रयू को अब पूरी तरह से एक निजी नागरिक की तरह जीवन व्यतीत करना होगा, शाही परिवार के सक्रिय सदस्यों से दूर।
यह फैसला प्रिंस एंड्रयू के लिए एक भयानक व्यक्तिगत झटका है। एक समय वह सिंहासन की कतार में थे, आज वह अपने ही परिवार के महल से बाहर हैं। यह घटना शाही परिवार की क्रूर सच्चाई को दर्शाती है—जहाँ ताज और जनता की सेवा व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर होती है। किंग चार्ल्स ने दर्द में डूबे इस निर्णय को लेकर, यह स्पष्ट कर दिया है कि राजशाही में अब किसी भी कलंक या नैतिक फिसलन के लिए कोई जगह नहीं है।
यह वास्तव में एक दुखद और जटिल मानवीय त्रासदी है, जो दिखाती है कि कैसे सत्ता, पैसा और शाही विशेषाधिकार एक भयानक जाल बुन सकते हैं। प्रिंस एंड्रयू और वर्जीनिया गिफ्रे का मामला सिर्फ यौन शोषण का आरोप नहीं है, बल्कि एक किशोरी के शोषण और एक शाही परिवार पर लगे कलंक की दर्दनाक कहानी है।
वर्जीनिया गिफ्रे और प्रिंस एंड्रयू का शर्मनाक मामला
एपस्टीन का जाल, एक किशोरी का आरोप, और प्रिंस एंड्रयू पर लगा जीवनभर का दाग

- मामले की जड़: जेफरी एपस्टीन का घिनौना जाल
प्रिंस एंड्रयू के खिलाफ लगे आरोपों की जड़ें अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल के आपराधिक नेटवर्क में हैं।
- एपस्टीन का तरीका: जेफरी एपस्टीन एक अरबपति फाइनेंसर था, जो अपनी दौलत और रुतबे का इस्तेमाल कर नाबालिग लड़कियों की तस्करी (Human Trafficking) करता था। मैक्सवेल इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर लाती थी। लड़कियों को मसाज या अन्य प्रलोभनों के बहाने बुलाया जाता था, और फिर उनका यौन शोषण किया जाता था।
- प्रिंस एंड्रयू का संबंध: प्रिंस एंड्रयू और एपस्टीन की दोस्ती 1999 के आसपास शुरू हुई और वर्षों तक चली। एंड्रयू एपस्टीन के निजी विमानों में यात्रा करते थे और उसकी आलीशान संपत्तियों पर जाते थे, यहाँ तक कि एपस्टीन पर यौन अपराधों के आरोप लगने के बाद भी। यही दोस्ती प्रिंस एंड्रयू के पतन का कारण बनी।
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वर्जीनिया गिफ्रे के गंभीर आरोप और यौन शोषण का स्वरूप
वर्जीनिया गिफ्रे (उस समय वर्जीनिया रॉबर्ट्स) जेफरी एपस्टीन के इस शोषण के जाल की प्रमुख शिकार थीं। उन्होंने प्रिंस एंड्रयू पर बेहद गंभीर और विस्तृत आरोप लगाए:
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- नाबालिगता का दावा: वर्जीनिया गिफ्रे ने दावा किया कि जब प्रिंस एंड्रयू ने उनका यौन शोषण किया, तब वह सिर्फ 17 साल की थीं (ब्रिटेन और अमेरिका के कुछ हिस्सों में कानूनी रूप से नाबालिग)।
- यौन शोषण का स्वरूप:
- गिफ्रे ने दावा किया कि एपस्टीन और मैक्सवेल ने उन्हें तीन बार प्रिंस एंड्रयू के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया।
- इन मुलाकातों में लंदन में मैक्सवेल के घर, न्यूयॉर्क में एपस्टीन के मैनहट्टन अपार्टमेंट, और वर्जिन आइलैंड्स पर एपस्टीन के निजी द्वीप पर हुई थीं।
- गिफ्रे ने अपनी किताब में खुलासा किया कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि प्रिंस एंड्रयू उनके साथ यौन संबंध बनाना अपना ‘जन्मसिद्ध अधिकार’ मानते थे।
- गिफ्रे का दावा है कि इन मुलाकातों के बाद मैक्सवेल कथित तौर पर उनसे कहती थी, “तुमने बहुत अच्छा किया। प्रिंस ने मजे किए।” और एपस्टीन उन्हें इसके लिए पैसे देता था।
- प्रिंस एंड्रयू का खंडन: प्रिंस एंड्रयू ने हमेशा इन सभी आरोपों का जोरदार खंडन किया। उन्होंने दावा किया कि वह गिफ्रे से कभी नहीं मिले, या अगर मिले भी तो उन्हें याद नहीं। 2019 में BBC को दिए एक विवादित इंटरव्यू में, उन्होंने आरोपों का खंडन करने के लिए कुछ अजीब कारण दिए, जैसे कि उस रात वह पिज्जा खाने गए थे, और उन्हें पसीना नहीं आता (गिफ्रे ने दावा किया था कि वह नाचने के दौरान पसीने से भीग गए थे)। इन बयानों ने जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता को और कम कर दिया।
III. अदालत तक पहुँचा मामला और कानूनी निपटान
यह मामला अंततः अमेरिका की अदालत तक पहुँचा:
- 2021 में मुकदमा: वर्जीनिया गिफ्रे ने 2021 में प्रिंस एंड्रयू के खिलाफ न्यूयॉर्क में एक दीवानी (सिविल) मुकदमा दायर किया, जिसमें यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया।
- दबाव और शाही संकट: यह मुकदमा शाही परिवार के लिए एक बड़ा संकट बन गया। प्रिंस एंड्रयू ने मुकदमे को खारिज करने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने उसे आगे बढ़ने की अनुमति दी। इससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रिंस एंड्रयू को अब जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
- सैन्य उपाधियों की वापसी: बढ़ते सार्वजनिक और कानूनी दबाव के कारण, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 2022 की शुरुआत में प्रिंस एंड्रयू की सभी सैन्य उपाधियाँ और शाही संरक्षक पद वापस ले लिए, जिससे वह एक निजी नागरिक बन गए।
- 2022 में समझौता: मुकदमे को सार्वजनिक रूप से जारी रखने और जूरी ट्रायल की शर्मिंदगी से बचने के लिए, प्रिंस एंड्रयू ने फरवरी 2022 में गिफ्रे के साथ कोर्ट के बाहर एक बड़ा कानूनी निपटान (Settlement) किया। निपटान की राशि का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया, लेकिन यह लाखों पाउंड में होने का अनुमान है।
यह समझौता एक कानूनी स्वीकारोक्ति नहीं थी, लेकिन इसने उन्हें आरोपों के कारण अपने पद और सम्मान से हाथ धोने के लिए मजबूर कर दिया।
https://x.com/HelCross/status/1984124630995759394
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क्या अन्य मामले भी सामने आए?
हाँ, प्रिंस एंड्रयू के संदर्भ में भी अन्य आरोप सामने आए, और व्यापक एपस्टीन मामले में तो दर्जनों पीड़ितों के बयान दर्ज हैं:
- जोहाना सोजबर्ग का आरोप: एपस्टीन से जुड़ी एक अन्य महिला, जोहाना सोजबर्ग, ने दावा किया था कि साल 2001 में एपस्टीन के मैनहट्टन अपार्टमेंट के अंदर सोफे पर बैठे हुए प्रिंस एंड्रयू ने उनके साथ छेड़छाड़ (Molestation) की थी।
- एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files): हाल के वर्षों में एपस्टीन से जुड़े कानूनी दस्तावेज (Epstein Files) सार्वजनिक हुए हैं। इन फाइलों में एपस्टीन के कई सहयोगियों और पीड़ितों के बयान शामिल हैं, जिनमें प्रिंस एंड्रयू का नाम बार-बार आया है, जो दिखाता है कि वह एपस्टीन के नेटवर्क का एक हिस्सा थे।
- गिफ्रे की आत्मकथा: वर्जीनिया गिफ्रे ने अपनी आत्मकथा में भी प्रिंस एंड्रयू पर लगे आरोपों को विस्तार से बताया है, जिससे यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आया।
https://x.com/Abdalmonim11800/status/1744169895510642819
कुल मिलाकर, प्रिंस एंड्रयू का मामला जेफरी एपस्टीन के यौन तस्करी नेटवर्क से जुड़ा एक गंभीर अपराध है, जिसने शाही परिवार की छवि को दशकों तक दागदार रखा और अंततः किंग चार्ल्स को अपने छोटे भाई को शाही विशेषाधिकारों से वंचित करने का कठोर निर्णय लेने पर मजबूर किया।








